गोपालगंज: शराबबंदी वाले बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। भोरे थाना क्षेत्र के भदवही गांव में हुई शराब बरामदगी के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और जांच में बरती गई कथित गंभीर अनियमितताओं पर विशेष उत्पाद न्यायाधीश प्रथम की कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने भोरे थानाध्यक्ष समेत चार पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर सशरीर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने जिन अधिकारियों से जवाब-तलब किया है, उनमें भोरे थानाध्यक्ष रोहिणी उपाध्याय, पुलिस निरीक्षक सह पर्यवेक्षी पदाधिकारी राधा मोहन पंडित, मामले की अनुसंधानकर्ता ज्योति प्रिया शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट पूछा है कि कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप में उनके विरुद्ध वरीय अधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश क्यों न दिया जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एफआईआर के तथ्यों का अवलोकन करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए। प्राथमिकी में घटना की तिथि 20 अगस्त अंकित है, जबकि वादी के आवेदन पर हस्ताक्षर की तिथि 22 अगस्त 2026 दर्ज की गई है। कोर्ट ने इस दो दिन के अंतर पर जवाब मांगा है। प्राथमिकी के अनुसार, भदवही गांव निवासी रामाशंकर भगत के मकान की छत से आठ लीटर शराब बरामद हुई थी। इसके बावजूद पुलिस ने मकान मालिक को अभियुक्त न बनाकर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। पर्यवेक्षी पदाधिकारी राधा मोहन पंडित के पर्यवेक्षण पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट ने पूछा कि किस परिस्थिति में घटना के तुरंत बाद ही मामले की जांच और पर्यवेक्षण पूरा कर दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, 22 अगस्त को भोरे पुलिस ने भदवही गांव में रामाशंकर भगत के घर की छत से आठ लीटर अवैध शराब जब्त की थी। जब मामला कोर्ट पहुंचा, तो कागजी औपचारिकताओं में भारी कमियां और संदिग्ध तथ्य सामने आए। प्रथम दृष्टया इसे पुलिस की गंभीर लापरवाही मानते हुए कोर्ट ने चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट