गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले के भोरे अंचल क्षेत्र में फर्जीवाड़े और कागजी हेरफेर के जरिए कराए गए दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. अंचलाधिकारी भोरे द्वारा पारित एक विवादास्पद आदेश के खिलाफ अपीलकर्ता ने भूमि सुधार उपसमाहर्ता हथुआ के न्यायालय में दाखिल-खारिज अपील वाद दायर किया है. इस मामले ने अंचल कार्यालय की कार्यशैली और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ननिहाल की संपत्ति बेचने का है मामला
मिली जानकारी के अनुसार, अपीलकर्ता अजय कुमार तिवारी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के खामपार थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं. वर्तमान में वे भोरे थाना क्षेत्र के दमकिया गांव स्थित अपने ननिहाल में रहते हैं.आरोप है कि उनकी मौसी तारा देवी द्वारा उनकी मां के नाम से रजिस्टर्ड जमीन को फर्जी तरीके से बेच दिया गया है।
अपीलकर्ता के मुख्य आरोप:
फर्जी और कूटरचित दस्तावेज: अपीलकर्ता का आरोप है कि 28 मार्च 2026 को उनकी मौसी तारा देवी ने शरीफ अंसारी, अफसर अंसारी, पुतन अंसारी और नजमुन नेशा के पक्ष में एक रजिस्टर्ड दस्तावेज के जरिए जमीन की बिक्री कर दी.जबकि पारिवारिक बंटवारे और पूर्व के रजिस्टर्ड कागजातों के अनुसार विक्रेता के पास उस प्लॉट पर कोई वैध अधिकार या हिस्सा नहीं बचता है।
सांठगांठ कर म्यूटेशन स्वीकृत कराने का दावा:
आरोप है कि क्रेतागण ने हल्का और राजस्व कर्मचारियों के साथ मिलकर गलत जांच रिपोर्ट तैयार करवाई. इसके आधार पर भोरे अंचलाधिकारी ने बिना किसी भौतिक निरीक्षण, बिना सही कागजी जांच और बिना अपने विवेक का इस्तेमाल किए आनन-फानन में म्यूटेशन को मंजूरी दे दी।
दखल-कब्जे का अभाव और मारपीट का प्रयास:
अपीलकर्ता का कहना है कि फर्जी बैनामा के आधार पर जमीन पर क्रेतागण का कोई वास्तविक कब्जा नहीं है. आरोप है कि 30 मई 2026 की रात को असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया गया और मारपीट पर उतारू होने पर पीड़ित अजय तिवारी ने भोरे थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
न्यायालय से की गई मुख्य मांगें
अपीलकर्ता ने 'बिहार दाखिल-खारिज अधिनियम 2011' की सुसंगत धाराओं के तहत DCLR हथुआ के न्यायालय से गुहार लगाई है कि:इस अपील वाद को स्वीकार कर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाए. साथ ही भोरे अंचलाधिकारी द्वारा दाखिल-खारिज वाद संख्या 149/2026-2027 में 9 जून 2026 को पारित स्वीकृत आदेश को पूरी तरह निरस्त किया जाए।
साथ ही विवादित भूमि को पूर्व की जमाबंदी में वापस बहाल करने के लिए संबंधित अंचल अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। यह पूरा मामला क्षेत्र में अब चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सबकी निगाहें DCLR हथुआ के न्यायालय की आगामी कार्रवाई और सुनवाई पर टिकी हैं।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट