बिहार के गया जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आपको हैरान कर देगी। महज ढाई साल की उम्र और सैकड़ों देशों के झंडे देखकर उनके नाम बताने की अद्भुत प्रतिभा। गया के टेकारी अनुमंडल के कोच प्रखंड के उतरेन गांव की रहने वाली नन्हीं वाणी ने अपनी इस अनोखी प्रतिभा से इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। अब वाणी के परिवार की नजर प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर है। इसके लिए वाणी को दुनिया के 195 देशों के झंडे पहचानने होंगे।
ये तस्वीरें हैं गया जिले के कोच प्रखंड के उतरेन गांव की रहने वाली महज 2 साल 10 महीने की नन्हीं वाणी की। उम्र भले ही छोटी है, लेकिन प्रतिभा ऐसी कि बड़े-बड़े भी हैरान रह जाएं। वाणी को अलग-अलग देशों के झंडे दिखाइए और वह तुरंत झंडे को देखकर देश का नाम बता देती है। बताया जा रहा है कि वाणी अब तक 153 से अधिक देशों के झंडों को पहचानकर उनके नाम बता चुकी है।
वाणी की इस अद्भुत प्रतिभा का पता उसके पिता रविकांत कुमार को उस वक्त चला, जब ढाई साल की उम्र में खेल-खेल में वाणी ने एक पोस्टर पर बने 20 देशों के झंडे देखकर उनके नाम बता दिए। इसके बाद पिता ने वाणी की प्रतिभा को गंभीरता से लिया और उसकी क्षमता को निखारने की कोशिश शुरू की। कुछ ही समय में वाणी ने 45 एशियाई देशों के झंडे पहचानने शुरू कर दिए।
29 जून 2026 को वाणी को 45 एशियन कंट्री के नाम पहचानने के लिए पहला अवार्ड मिला। इसके बाद परिवार ने उसकी तैयारी और तेज कर दी। महज 10 दिनों के अंदर वाणी ने 127 देशों के झंडे पहचानने की क्षमता हासिल कर ली। परिवार ने इसका वीडियो बनाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड को भेजा, जिसके बाद वाणी का रिकॉर्ड कंफर्म किया गया।
परिजनों के मुताबिक, वाणी ने 127 देशों के नाम महज 6 मिनट 35 सेकंड में झंडे देखकर बताए। इससे पहले 45 देशों के नाम उसने 2 मिनट 10 सेकंड में बताए थे, जिसके आधार पर उसे प्रमाण पत्र भी मिला। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से वाणी को मेडल, आई कार्ड और रिकॉर्ड बुक देकर सम्मानित किया गया है।
बेटी की इस प्रतिभा को देखकर पिता रविकांत कुमार भी बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि वाणी को बचपन से ही रंगों में काफी रुचि थी। इसी वजह से अलग-अलग देशों के झंडों के रंग और डिजाइन को देखकर वह उन्हें आसानी से पहचान लेती है। अब परिवार का लक्ष्य वाणी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराना है।
वाणी की मां पल्लवी मिश्रा और परिवार के अन्य सदस्य भी उसकी प्रतिभा से बेहद खुश हैं। परिवार का कहना है कि दोनों बेटियां अभी छोटी हैं और अल्फाबेट भी पूरी तरह नहीं जानतीं, लेकिन वाणी सैकड़ों देशों के नाम झंडे देखकर बता देती है। यही वजह है कि परिवार वाणी की इस प्रतिभा को आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है।
वाणी के दादा राम पांडे बताते हैं कि उनकी पोती को रंगों की शानदार समझ है। वह झंडे के रंग और पैटर्न को देखकर देश का नाम बता देती है। परिवार ने अब दुनिया के 195 देशों के झंडों की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि वाणी जल्द से जल्द वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर कदम बढ़ा सके।
गया की नन्हीं वाणी की यह प्रतिभा वाकई अद्भुत है। जिस उम्र में बच्चे खेल-खेल में अक्षर और रंग सीखते हैं, उस उम्र में वाणी सैकड़ों देशों के झंडे पहचानकर उनके नाम बता रही है। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद अब वाणी और उसके परिवार की नजर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर है। अगर वाणी 195 देशों के झंडे पहचानने में कामयाब होती है, तो यह नन्हीं प्रतिभा दुनिया के सामने बिहार और गया का नाम रोशन कर सकती है।
गया से मनोज कुमार की रिपोर्ट