92 लड़के, 27 लड़कियां और 250 करोड़ की ठगी, हिल गया पूरा देश

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 92 लड़के, 27 लड़कियां और 250 करोड़ की ठगी का खुलासा हुआ है। लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jul 02, 2026, 6:17:00 PM

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 92 लड़के, 27 लड़कियां और 250 करोड़ की ठगी का खुलासा हुआ है। लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है। जहां 250 करोड़ से अधिक की ठगी में 119 साइबर अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है, जिसमें 27 लड़कियां भी शामिल हैं। साइबर अपराध में प्रयुक्त 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किया गया है। 

लखनऊ पुलिस ने लंबी पड़ताल के बाद समिट बिल्डिंग के 11 फ्लोर पर छापा मारा तो खलबली मच गई। साइबर अपराधियों के संगठित गिरोह का लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने पर्दाफाश किया है। पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट लखनऊ अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देशन पर टीम को बड़ी सफलता मिली है। एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। यह संगठित साइबर गिरोह तकनीकी संसाधनों एवं इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी कर रहा था।

गिरोह का नेटवर्क लखनऊ के अलावा पांच से अधिक राज्यों तक फैला हुआ है। इस कंपनी की नेट वर्थ पांच सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की है। काल सेंटर का मालिक विनीत शर्मा ठगी की रकम तीन देशों से होते हुए हवाला के जरिए मंगाता था। फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से अमेरिका व अन्य देशो के लोगों को यह गिरोह अब तक 250 करोड़ ₹ का चूना लगा चुका था। यह गैंग डॉलर एप ARQ (पूर्व नाम: DolarApp) के माध्यम से साइबर ठगी कर रहा था। गिरोह का संचालन कर रहे अहमदाबाद निवासी ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार से पुलिस टीम पूछताछ कर रही है।

करीब 15 दिन पहले इस नेटवर्क के संबंध में इनपुट मिला था। इनपुट के आधार पर साइबर सेल और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने निगरानी शुरू की। यहां बिना किसी नाम और बोर्ड के जनवरी 2025 से काल सेंटर संचालित किया जा रहा था। कॉल सेंटर सिर्फ रात में ही संचालित होता था। यह लोग  खुद को एफबीआई का अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों को झांसे में लेते थे। पूरा गिरोह यूएसए से संचालित हो रहा था। आरोपी ठगी की रकम अमेरिका के बैंक खातों में मंगाते थे और उसे क्रिप्टो करेंसी में बदलकर आपस में बांट लेते थे। करीब 24 घंटे तक चली पड़ताल के बाद पुलिस ने 27 युवतियों और 92 युवकों को हिरासत में लिया है। 

जांच में पता चला कि काल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी विदेशी नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों को फोन करते थे। उन्हें बैंक खाते से रुपये डेबिट होने, तकनीकी समस्या, पार्नोग्राफी या अन्य वित्तीय जोखिम का झांसा देकर मदद के नाम पर अपने जाल में फंसाता  था। बदनामी का डर दिखाकर गिफ्ट कार्ड, डिजिटल कूपन और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से रकम हासिल की जाती थी, ताकि लेन-देन सरकारी निगरानी से बचा सके। काल सेंटर का संचालन सोलारिस साल्यूशन के नाम से होने की जानकारी मिली है। पुलिस ने अहमदाबाद निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को हिरासत में लिया है। दोनों यहां आपरेशन मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे।