MNREGA का नाम बदलेगी केंद्र सरकार, अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ होगा नाम

MNREGA का नाम बदलेगी केंद्र सरकार, अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ होगा नाम

MNREGA का नाम बदलेगी केंद्र सरकार, अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ होगा नाम
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 12, 2025, 4:43:00 PM

केंद्र सरकार देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने की तैयारी में है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जल्द ही इस योजना को नए नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ के रूप में पहचान दी जा सकती है। ग्रामीण विकास मंत्रालय इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।

गांधी दर्शन को और करीब से जोड़ने की पहल

पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से मनरेगा ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने की एक केंद्रीय योजना रही है। अब केंद्र सरकार इसे महात्मा गांधी के विचारों, श्रम सम्मान और ग्रामीण विकास के उनके सिद्धांतों से और मजबूत तरीके से जोड़ने पर विचार कर रही है। सूत्रों का कहना है कि नया नाम गांधीवादी दृष्टिकोण को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाएगा और ग्रामीण श्रमिकों को राष्ट्र-निर्माण से जोड़ने के सरकार के संदेश को मजबूती देगा।

नाम बदलने की वजहें

सरकारी हलकों में यह राय बनी है कि मनरेगा का नाम लंबा और bureaucratic होने के कारण नए लाभार्थियों को इसे समझने में कठिनाई होती है। कई राज्यों ने भी सुझाव भेजे थे कि योजना का नाम सरल, सहज और अधिक अर्थपूर्ण होना चाहिए।
इसके अलावा, गांधी के विचारों पर आधारित ग्रामीण विकास मॉडल को जनमानस में फिर से प्रमुखता देने का अवसर भी सरकार इस कदम के जरिए देख रही है। यह बदलाव वर्ष 2025 में गांधी से जुड़े राष्ट्रीय आयोजनों के साथ भी जोड़ा जा सकता है।

क्या बदलेगा और क्या पहले जैसा रहेगा?

फिलहाल योजना के ढांचे, रोजगार गारंटी, मजदूरी प्रावधानों या कार्य दिवसों में किसी बड़े बदलाव की पुष्टि नहीं है। हालांकि, नाम परिवर्तन के साथ कुछ आंतरिक सुधारों पर भी विचार किया जा रहा है—

  • डिजिटल भुगतान प्रणाली को और मजबूत करना

  • सामाजिक ऑडिट को पारदर्शी बनाना

  • पंचायतों की भूमिका को और अधिक सशक्त करना

विशेषज्ञों के अनुसार, नया नाम योजना की “पहचान” को और स्पष्ट करेगा ताकि ग्रामीण मजदूर इसे आसानी से समझ और पहचान सकें।

राजनीतिक स्तर पर हलचल तय

योजना का नाम बदलने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तीखी हो सकती हैं। विपक्ष पहले से ही कई सरकारी योजनाओं के नाम बदलने का विरोध करता रहा है। मनरेगा, जो 2005 में यूपीए सरकार की प्रमुख उपलब्धि मानी जाती है, उसका नाम बदलना एक नया विवाद खड़ा कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस इसका कड़ा विरोध कर सकती है।

ग्रामीण क्षेत्र में संभावित प्रभाव

गांवों में इस परिवर्तन का व्यावहारिक असर तब दिखेगा जब नए नाम को सभी आधिकारिक दस्तावेज़ों, जॉब कार्ड, भुगतान रसीदों, कार्यस्थल बोर्डों और डिजिटल पोर्टल पर लागू किया जाएगा।
अगर केवल नाम बदला और प्रक्रियाएं वही रहीं, तो यह बदलाव औपचारिक रह सकता है।
लेकिन यदि भुगतान में तेजी, पारदर्शिता और प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे सुधार लागू होते हैं, तो इससे ग्रामीण परिवारों को वास्तविक राहत मिल सकती है।