आधार से पासपोर्ट तक... जनगणना 2027 में कौन-कौन सी जानकारी ली जाएगी आपसे?

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के दूसरे चरण, यानी जनसंख्या गणना के लिए प्रश्नावली में शामिल किए जाने वाले करीब 40 सवालों को अधिसूचित कर दिया है। स्वतंत्र भारत में पहली बार जनगणना के इस चरण में जाति से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़ी जानकारी, शिक्षा, रोजगार, प्रवास, परिवार और महिलाओं से संबंधित कई सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को भी गणना का हिस्सा बनाया गया है।
रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक प्रश्नावली में जाति संबंधी सवाल को विशेष रूप से शामिल किया गया है। दसवें प्रश्न में उत्तरदाता से एससी, एसटी या जाति के बारे में जानकारी ली जाएगी। गणनाकर्ता व्यक्ति द्वारा बताई गई जाति को निर्धारित खुले कॉलम में उसी रूप में दर्ज करेंगे। यह व्यवस्था जुलाई 2026 में 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए प्री-टेस्ट के अनुभव के आधार पर तय की गई है।

नई प्रश्नावली में लोगों की धार्मिक पहचान, मातृभाषा और अन्य भाषाओं के ज्ञान के साथ-साथ साक्षरता एवं डिजिटल साक्षरता की स्थिति दर्ज की जाएगी। आर्थिक गतिविधियों से संबंधित सवालों में व्यक्ति के व्यवसाय, उद्योग या सेवा के प्रकार और उसकी कार्यकर्ता श्रेणी जैसी जानकारियां शामिल होंगी। परिवार और महिलाओं से जुड़े आंकड़े जुटाने के लिए भी विस्तृत सवाल रखे गए हैं। विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं से उनके जीवित बच्चों, जीवन में कभी जन्मे बच्चों तथा पिछले एक वर्ष में हुए जन्म से संबंधित जानकारी ली जाएगी।
प्रश्नावली में कुछ व्यक्तिगत पहचान संबंधी विवरणों को भी शामिल किया गया है। इसमें उपलब्ध होने पर मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी और भारतीय पासपोर्ट से संबंधित जानकारी पूछी जाएगी। ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता तथा व्यक्ति के कुल बैंक खातों की संख्या के बारे में भी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्म तिथि, उम्र, वैवाहिक स्थिति, विवाह की आयु, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म, जाति या जनजाति तथा माता-पिता से संबंधित विवरण भी प्रश्नावली का हिस्सा होंगे।
जनगणना के दौरान लोगों के जन्म स्थान, आखिरी निवास स्थान, वहां से स्थानांतरण का कारण, कितने समय से वर्तमान स्थान पर रह रहे हैं और स्थायी पते जैसी प्रवास संबंधी जानकारियां भी जुटाई जाएंगी। शिक्षा, कौशल और भाषा से जुड़े सवालों के जरिए देश की सामाजिक एवं मानव संसाधन स्थिति की व्यापक तस्वीर तैयार करने का प्रयास होगा।

पहाड़ी और बर्फीले क्षेत्रों में सितंबर से शुरू होगी गणना
अधिसूचना के अनुसार लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले एवं दुर्गम क्षेत्रों में जनगणना 2027 का दूसरा चरण 1 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा। इन क्षेत्रों के लोगों के लिए 17 से 31 अगस्त के बीच ऑनलाइन स्व-गणना के जरिए अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
देश के अन्य हिस्सों में जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। पूरी जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में मकानों और आवास से जुड़ी सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं, जबकि दूसरे चरण में देश की आबादी के प्रत्येक सदस्य की जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी।
सरकार के अनुसार जनगणना 2027 स्वतंत्र भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। इसके जरिए तैयार होने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल नीति निर्माण, सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लक्षित करने और देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को समझने में किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान उपलब्ध कराई गई व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता बरकरार रखी जाएगी। जनगणना कानून के प्रावधानों के तहत इन आंकड़ों को कानूनी साक्ष्य या सरकारी लाभ हासिल करने के आधार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। जानकारी घर-घर जाकर गणनाकर्ताओं के माध्यम से या स्व-गणना पोर्टल के जरिए दर्ज की जा सकेगी।











