दिवा और जीत अदाणी ने दिव्यांग महिलाओं के साथ मनाई अपनी शादी की पहली सालगिरह

दिवा और जीत अदाणी ने दिव्यांग महिलाओं के साथ मनाई अपनी शादी की पहली सालगिरह

दिवा और जीत अदाणी ने दिव्यांग महिलाओं के साथ मनाई अपनी शादी की पहली सालगिरह
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Feb 06, 2026, 9:58:00 AM

गुरुवार शाम शांतिग्राम स्थित बेल्वेडियर क्लब का लॉन एक अलग ही माहौल का गवाह बना, जहां जश्न का केंद्र किसी भव्य आयोजन से अधिक सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी थी। मौका था अदाणी मंगल सेवा के एक वर्ष पूरे होने का—एक ऐसी पहल, जिसकी शुरुआत दिवा और जीत अदाणी ने अपने विवाह से पहले 7 फरवरी 2025 को एक निजी संकल्प के रूप में की थी।

यह पहल अब एक संगठित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम का रूप ले चुकी है, जिसका उद्देश्य दिव्यांग महिलाओं को केवल तत्काल सहायता देना नहीं, बल्कि लंबी अवधि की आर्थिक स्थिरता उपलब्ध कराना है। अदाणी मंगल सेवा की शुरुआत एक पारिवारिक निर्णय के तौर पर हुई थी, जिसमें यह तय किया गया कि जीवन के एक महत्वपूर्ण अवसर को केवल निजी उत्सव तक सीमित न रखकर उसे समाज के लिए उपयोगी उद्देश्य से जोड़ा जाएगा। अब एक साल बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह वादा केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि इसे व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया गया।

हर साल 500 महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा

इस योजना के तहत हर वर्ष 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग की 500 दिव्यांग महिलाओं को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है। लाभार्थियों का चयन यूडीआईडी (विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र) के आधार पर किया गया है, जिन्हें यूथ फॉर जॉब्स प्रोजेक्ट के जरिए चिन्हित किया गया।

प्रत्येक लाभार्थी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ साझेदारी में 10 लाख रुपये की सावधि जमा (एफडी) प्रदान की जाती है। इस एफडी के माध्यम से लाभार्थियों को नियमित मासिक आय सुनिश्चित होती है, जबकि 10 वर्षों के बाद मूलधन राशि उन्हें वापस प्राप्त होती है। इस व्यवस्था को एकमुश्त सहायता के बजाय दीर्घकालिक वित्तीय संरक्षण के तौर पर तैयार किया गया है।

इस कार्यक्रम को निरंतर जारी रखने के लिए हर साल 50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

‘सेवा ही साधना है’ के विचार से प्रेरित

इस पहल को अदाणी समूह के संस्थापक और चेयरमैन गौतम अदाणी के उस दर्शन से जोड़ा जा रहा है, जिसे वे अक्सर “सेवा ही साधना है” के रूप में व्यक्त करते हैं। इस विचार के तहत सेवा को क्षणिक प्रयास नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ निरंतर चलने वाली प्रक्रिया माना गया है। कार्यक्रम में लाभार्थी महिलाएं अपने परिवारों के साथ समूहों में पहुंचीं। आयोजन की शुरुआत प्रार्थना और चिंतन के साथ हुई, जिसके बाद एक प्रस्तुति के जरिए मंगल सेवा की मूल भावना दोहराई गई—कि समृद्धि का वास्तविक अर्थ तभी है जब वह दूसरों के लिए भी स्थायी अवसर तैयार करे।

शाम का सबसे अहम क्षण तब आया जब लाभार्थियों को एफडी प्रमाणपत्र सौंपे गए। प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाली महिलाओं के चेहरों पर सुरक्षा और संतोष साफ झलक रहा था।

इसके बाद अहमदाबाद के नेत्रहीन संघ द्वारा गरबा और फ्यूजन संगीत जैसी प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने आयोजन को सांस्कृतिक रंग भी प्रदान किया।

गौतम अदाणी का संदेश: ‘बेटियों की मुस्कान सबसे बड़ी उपलब्धि’

इस अवसर पर गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जीत और दिवा को वैवाहिक जीवन के एक वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि मंगल सेवा के तहत हर वर्ष 500 नवविवाहित दिव्यांग बहनों को 10 लाख रुपये का सहयोग देने का प्रण लिया गया था, जो उसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि किसी बेटी के जीवन में मुस्कान और आत्मविश्वास लौटते देखना किसी भी बड़े वैभव से अधिक संतोष देता है और एक पिता के रूप में उन्हें गर्व है कि उनके बच्चे अपनी खुशियों के साथ दूसरों के जीवन में भी आशा जोड़ रहे हैं।

प्रीति अदाणी: ‘यह कार्यक्रम नहीं, गरिमा और सशक्तिकरण का प्रतीक है’

अदाणी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन उनके लिए भावनात्मक और गर्व से भरा है। उन्होंने मंगल सेवा को एक ऐसी सोच का परिणाम बताया, जिसमें व्यक्तिगत खुशी का सबसे बड़ा अर्थ उसे सामूहिक कल्याण से जोड़ने में है।

उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांगता कोई बाधा नहीं, बल्कि साहस, लचीलापन और जीवन को अलग नजरिए से देखने की शक्ति है, और यहां मौजूद महिलाएं उसी क्षमता का प्रमाण हैं।

जीत और दिवा अदाणी: ‘यह जिम्मेदारी है, जिसे लगातार निभाया जाएगा’

जीत अदाणी ने कहा कि मंगल सेवा ने उन्हें सिखाया कि सबसे बड़ा सहयोग वह होता है जो शांत तरीके से, निरंतर और सम्मान के साथ मिलता रहे। उन्होंने इसे एक बार की पहल नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जिम्मेदारी बताया।

वहीं दिवा अदाणी ने कहा कि यह योजना इस विश्वास पर आधारित है कि सुरक्षा अस्थायी नहीं होनी चाहिए और गरिमा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं हो सकती।

कॉफी टेबल बुक का विमोचन, सामूहिक रात्रिभोज के साथ समापन

कार्यक्रम के दौरान गौतम अदाणी ने अदाणी मंगल सेवा की कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया, जिसमें परिवर्तन और संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्राओं को संकलित किया गया है। आयोजन का समापन सामूहिक रात्रिभोज के साथ हुआ।

सेवा का दायरा: महाकुंभ से रथयात्रा तक

मंगल सेवा की एक वर्ष की यात्रा को व्यापक सेवा कार्यों से भी जोड़ा गया। जानकारी के अनुसार, प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान किए गए सेवा प्रयासों से लेकर पिछले वर्ष पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों को सहायता देने तक, समूह की पहल का संदेश एक ही रहा—कि वास्तविक समृद्धि वही है जो समाज के लिए उपयोगी बन सके।

अदाणी मंगल सेवा ने अपने पहले वर्ष में यह संकेत दिया है कि जब अवसर को नहीं, बल्कि उद्देश्य को प्राथमिकता दी जाती है, तो उसका प्रभाव कहीं अधिक दूर तक पहुंचता है।