रिम्स की अधिग्रहित जमीन की अवैध बिक्री मामले में आरोपियों की बेल याचिका पर सुनवाई

रिम्स की अधिग्रहित जमीन की अवैध बिक्री मामले में आरोपियों की बेल याचिका पर सुनवाई

रिम्स की अधिग्रहित जमीन की अवैध बिक्री मामले में आरोपियों की बेल याचिका पर सुनवाई
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 26, 2026, 12:26:00 PM

रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) की अधिग्रहित जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों की जमानत याचिका पर मंगलवार को एसीबी की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। मामले में आरोपी बनाए गए राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक की ओर से दाखिल बेल पिटीशन पर अदालत ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा प्रस्तुत केस डायरी का अवलोकन किया। इसके बाद कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तारीख निर्धारित कर दी।

इससे पहले हुई सुनवाई में विशेष अदालत ने जांच एजेंसी को केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया था। आदेश के अनुपालन में एसीबी ने जांच से जुड़े दस्तावेज अदालत के समक्ष जमा किए।

यह मामला रिम्स परिसर से जुड़ी करीब सात एकड़ सरकारी भूमि के कथित फर्जीवाड़े से संबंधित है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अधिग्रहित जमीन को जाली दस्तावेजों और गलत वंशावली के आधार पर निजी संपत्ति के रूप में दर्शाकर उसकी खरीद-बिक्री की गई।

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद एसीबी ने बीते महीने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार लोगों में राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, चेतन कुमार और राजेश कुमार झा शामिल हैं। जांच के दौरान कई सरकारी अधिकारी और कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में 16 सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता की जांच चल रही है।

एसीबी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वर्ष 1964-65 में अधिग्रहित की गई रिम्स की जमीन को भू-माफियाओं ने फर्जी कागजात के जरिए निजी जमीन के रूप में प्रस्तुत किया। इसके बाद उक्त जमीन को बिल्डरों के हाथों बेचने का आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस सौदे के जरिए करीब 31 लाख रुपये का लेनदेन किया गया।

पूरे मामले को लेकर एसीबी ने कांड संख्या 1/2026 दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और दस्तावेजों की वैधता की भी पड़ताल कर रही है।