JTET 2026 में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग तेज, मंत्री दीपिका पांडेय ने कांग्रेस प्रभारी को सौंपा प्रस्ताव

JTET 2026 में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग तेज, मंत्री दीपिका पांडेय ने कांग्रेस प्रभारी को सौंपा प्रस्ताव

JTET 2026 में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग तेज, मंत्री दीपिका पांडेय ने कांग्रेस प्रभारी को सौंपा प्रस्ताव
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 29, 2026, 5:56:00 PM

झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 को लेकर क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने शुक्रवार को झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू से मुलाकात कर इस विषय पर विस्तृत सुझाव पत्र सौंपा और परीक्षा में कई भाषाओं को शामिल किए जाने की मांग रखी।

मंत्री ने कहा कि राज्य की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा में अधिक से अधिक क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि पूर्व में आयोजित JTET परीक्षाओं (2008, 2012 और 2016) में अंगिका, भोजपुरी और मगही जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन हालिया अधिसूचना में इन भाषाओं को सूची से बाहर रखा गया है।

दीपिका पांडेय ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जुड़ाव का आधार भी है। ऐसे में युवाओं को अपनी मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में दक्ष बनाने के लिए जरूरी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इन भाषाओं को विकल्प के तौर पर उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि मामला केवल अंगिका, भोजपुरी, मगही और मैथिली तक सीमित नहीं है। जनजातीय भाषाओं की सूची में असुर, बिरहोर और माल्तो जैसी भाषाओं को शामिल नहीं किया जाना भी चिंता का विषय है। इसके साथ ही संथाल परगना क्षेत्र में व्यापक रूप से बोली जाने वाली कुरमाली भाषा को क्षेत्रीय भाषा सूची में स्थान नहीं मिलने पर भी उन्होंने सवाल उठाए।

मंत्री के अनुसार, झारखंड की सांस्कृतिक विरासत उसकी बहुभाषी पहचान में निहित है और यदि विभिन्न भाषाई समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है, तो यह राज्य की समृद्ध परंपरा के साथ न्याय नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि सरकार सभी संबंधित भाषाओं पर पुनर्विचार करे और JTET 2026 में इन्हें शामिल करते हुए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाया जाए।