झारखंड के भूमिगत संसाधनों की होगी नई मैपिंग, ड्रिलिंग परियोजनाओं को हरी झंडी
झारखंड के भूमिगत संसाधनों की होगी नई मैपिंग, ड्रिलिंग परियोजनाओं को हरी झंडी
झारखंड सरकार ने राज्य की खनिज संपदा का वैज्ञानिक आकलन करने और नए खनिज क्षेत्रों की पहचान को तेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। खान एवं भू-विज्ञान विभाग के तहत कार्यरत भू-विज्ञान निदेशालय ने खनिज अन्वेषण से जुड़े ड्रिलिंग कार्यों के लिए अनुभवी और तकनीकी रूप से सक्षम एजेंसियों को आमंत्रित किया है। इस कदम का उद्देश्य राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों का अधिक सटीक आंकलन करना और भविष्य के खनन विकास की मजबूत नींव तैयार करना है।
राज्य सरकार का मानना है कि उन्नत तकनीकों की सहायता से भूमिगत खनिज भंडारों की बेहतर पहचान की जा सकती है। इसी दिशा में वेट और ड्राई कोर ड्रिलिंग के साथ-साथ नॉन-कोर ड्रिलिंग कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इन प्रक्रियाओं के माध्यम से बॉक्साइट, लौह अयस्क, कोयला और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के संभावित क्षेत्रों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
राजस्व वृद्धि और विकास योजनाओं को मिलेगा बल
नए खनिज ब्लॉकों की पहचान और उनके वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद सरकार उन्हें पारदर्शी तरीके से नीलाम कर सकेगी। इससे राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। बढ़े हुए राजस्व का उपयोग बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास परियोजनाओं में किया जा सकेगा, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।
खनिज अन्वेषण परियोजनाओं के विस्तार से तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों स्तरों पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। परियोजनाओं के संचालन के लिए भू-वैज्ञानिक, माइनिंग इंजीनियर, ड्रिलिंग विशेषज्ञ, सर्वेक्षक और सॉफ्टवेयर पेशेवरों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर श्रमिकों और लॉजिस्टिक सेवाओं से जुड़े लोगों को भी काम मिलने की संभावना है।
ड्रिलिंग के दौरान एकत्रित होने वाले भूगर्भीय आंकड़ों को डिजिटल स्वरूप में तैयार किया जाएगा। उन्नत सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार किए जाने वाले ग्राफिकल रिकॉर्ड भविष्य में खनन परियोजनाओं की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विभाग ने कोर रिकवरी को अधिकतम स्तर पर बनाए रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है ताकि भूगर्भीय जानकारी की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
कौन कर सकेगा आवेदन
निदेशालय ने इस परियोजना के लिए कड़े तकनीकी और वित्तीय मानदंड तय किए हैं। आवेदन करने वाली संस्था कंपनी, एलएलपी, पंजीकृत साझेदारी फर्म या प्रोपराइटरशिप इकाई हो सकती है।
आवेदकों के लिए कुछ प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
- -न्यूनतम 50 लाख रुपये की नेटवर्थ अनिवार्य।
- -वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान कुल मिलाकर कम से कम 1 करोड़ रुपये का कारोबार।
- -पिछले दस वर्षों में कम से कम पांच ड्रिलिंग परियोजनाओं को पूरा करने का अनुभव।
- -इन परियोजनाओं में कुल न्यूनतम 5,000 मीटर ड्रिलिंग कार्य किया गया हो।
- -पांच परियोजनाओं में से कम से कम दो परियोजनाएं खनन अथवा खनिज क्षेत्र से संबंधित रही हों।
- अन्वेषण कार्यों में आवश्यकता के अनुसार वर्टिकल और एंगल्ड डायमंड कोर ड्रिलिंग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। ड्रिलिंग एचक्यू, एनक्यू और बीक्यू जैसे मानक आकारों में की जाएगी। वहीं, बॉक्साइट जैसे विशेष खनिजों के लिए ड्राई ड्रिलिंग तकनीक अपनाई जाएगी।
- गुणवत्ता और गोपनीयता पर विशेष जोर
विभाग ने स्पष्ट किया है कि ड्रिलिंग के दौरान कोर रिकवरी 90 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए। यदि किसी एजेंसी की लापरवाही के कारण निर्धारित मानक पूरे नहीं होते हैं, तो उसे अपने खर्च पर दोबारा ड्रिलिंग करनी पड़ सकती है।
साथ ही, ड्रिलिंग से प्राप्त सभी रिपोर्ट, नक्शे और तकनीकी आंकड़े राज्य सरकार की संपत्ति माने जाएंगे। किसी भी प्रकार की जानकारी को बिना अनुमति तीसरे पक्ष के साथ साझा करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रत्येक ड्रिलिंग परियोजना के लिए बहु-विषयक टीम की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसमें भू-वैज्ञानिक, माइनिंग इंजीनियर, ड्रिल ऑपरेटर, सर्वेक्षक और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ शामिल होंगे, ताकि खनिज अन्वेषण का पूरा कार्य वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से संपन्न किया जा सके।
झारखंड सरकार की यह पहल राज्य की खनिज क्षमता को नए सिरे से सामने लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल खनिज क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।