चक्रवृद्धि ब्याज ने बढ़ाई HEC की मुश्किलें, 2000 करोड़ के करीब कुल बकाया

चक्रवृद्धि ब्याज ने बढ़ाई HEC की मुश्किलें, 2000 करोड़ के करीब कुल बकाया

चक्रवृद्धि ब्याज ने बढ़ाई HEC की मुश्किलें, 2000 करोड़ के करीब कुल बकाया
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 26, 2026, 1:22:00 PM

कभी देश के औद्योगिक विकास की पहचान माने जाने वाले हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) पर अब अस्तित्व का संकट गहराता जा रहा है। वित्तीय दबाव, लगातार बढ़ते बकाया और घटते कारोबारी अवसरों के बीच कंपनी की स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो रांची स्थित यह सार्वजनिक उपक्रम गंभीर परिचालन संकट में फंस सकता है।

एचईसी के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती बिजली आपूर्ति को लेकर खड़ी हो गई है। बिजली वितरण कंपनी का करीब 300 करोड़ रुपये बकाया होने के बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, निगम ने साफ कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कम से कम 50 करोड़ रुपये का तत्काल भुगतान नहीं किया गया तो बिजली आपूर्ति बंद की जा सकती है।

बिजली कटौती की स्थिति में कारखाने का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे उत्पादन और प्रशासनिक गतिविधियां ठप पड़ने की आशंका है।

मानवीय आधार पर मिली राहत अब सीमित

राज्य सरकार अब तक संस्थान की स्थिति को देखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाती रही है और बिजली आपूर्ति जारी रखने में सहयोग करती रही। हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि लंबे समय तक इस व्यवस्था को जारी रखना संभव नहीं होगा। अधिकारियों का मानना है कि बकाया राशि लगातार बढ़ने से स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

एचईसी पर कुल देनदारियां लगभग 2000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी हैं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि भुगतान में देरी के कारण ब्याज लगातार बढ़ रहा है, जिससे कर्ज का दबाव और भारी होता जा रहा है।

संस्थान पर सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली CISF का लगभग 310 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा बिजली बिल और कर्मचारियों के भविष्य निधि (CPF) मद में करीब 300-300 करोड़ रुपये की देनदारी बताई जा रही है। अन्य ऋणों का आंकड़ा भी लगभग 300 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

वहीं कर्मचारियों के वेतन मद में करीब 150 करोड़ रुपये लंबित हैं, जबकि ग्रेच्युटी भुगतान के रूप में लगभग 70 करोड़ रुपये का बकाया है।

उत्पादन और कर्मचारियों पर मंडराया संकट

लगातार बढ़ते वित्तीय संकट का असर संस्थान के कर्मचारियों और उत्पादन क्षमता दोनों पर दिखाई देने लगा है। कार्यादेशों में कमी और भुगतान संकट के कारण संस्थान की आर्थिक सेहत लगातार कमजोर हुई है। यदि शीघ्र वित्तीय सहायता या पुनर्गठन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो एचईसी के सामने संचालन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।