चाईबासा में बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़, 30 लाख की 20 मोटरसाइकिलें जब्त
चाईबासा में बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़, 30 लाख की 20 मोटरसाइकिलें जब्त
पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक संगठित वाहन चोरी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। अभियान के दौरान पुलिस ने चोरी की 20 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 25 से 30 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पुलिस को सूचना मिली थी कि नोवामुंडी क्षेत्र में एक युवक चोरी की मोटरसाइकिलों के सौदे के लिए सक्रिय है। सूचना के आधार पर पश्चिमी सिंहभूम पुलिस अधीक्षक अमित रेणु के निर्देश पर किरीबुरु एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। इसी दौरान जानकारी मिली कि जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना की पुलिस भी एक वाहन चोर की तलाश में उसी इलाके में जांच कर रही है। इसके बाद दोनों जिलों की पुलिस ने समन्वय स्थापित कर संयुक्त अभियान चलाया।
जांच की शुरुआत नोवामुंडी थाना क्षेत्र के डुकासाई गांव से हुई, जहां पुलिस ने सोनू लोहरा उर्फ भोला को हिरासत में लिया। शुरुआती पूछताछ में उसने भ्रामक जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन बाद में पूछताछ के दौरान उसने चोरी की गई मोटरसाइकिलों को छिपाकर रखने वाले कई ठिकानों का खुलासा कर दिया।
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने सबसे पहले पांच मोटरसाइकिलें बरामद कीं। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और गिरोह से जुड़े दूसरे संदिग्ध राज पुरती का नाम सामने आया। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने टोटोंगढ़ा गांव में छापेमारी कर नौ और बाइक बरामद कीं। वहीं टाटीबा बिरहोर टोला से छह अतिरिक्त मोटरसाइकिलें जब्त की गईं। इस तरह कुल 20 चोरी के वाहन पुलिस के कब्जे में आए।
प्राथमिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि गिरोह चोरी के बाद मोटरसाइकिलों को दूर-दराज के ग्रामीण और जंगल से सटे इलाकों में छिपाकर रखता था। बाद में इन्हें कम कीमत पर बेचने की योजना बनाई जाती थी। बरामद वाहनों के संबंध में विभिन्न क्षेत्रों से चोरी की शिकायतें दर्ज होने की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बिरसानगर (जमशेदपुर) निवासी 20 वर्षीय सोनू लोहरा उर्फ भोला और टोटोंगढ़ा निवासी 23 वर्षीय राज पुरती के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ जारी है और जांच के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, अब बरामद मोटरसाइकिलों के पंजीकरण और चोरी के मामलों का मिलान किया जा रहा है, ताकि वास्तविक वाहन मालिकों की पहचान कर उन्हें उनके वाहन वापस सौंपे जा सकें। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह का नेटवर्क किन अन्य जिलों तक फैला हुआ था और अब तक कितने वाहन अवैध रूप से बेचे जा चुके हैं।