RJD विधायक के समर्थन में उतरे BJP विधायक, बिहार विधानसभा में जेडीयू बन गया 'विपक्ष' CM सम्राट को देना पड़ा जवाब
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान राज्य में शिक्षकों और उच्च शिक्षा विभाग में खाली पड़े पदों का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एक सुर में नजर आए। सत्ता पक्ष के ही विधायकों ने अपनी ही सरकार को घेरते हुए विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर रिक्तियों का सवाल उठाया। राजद विधायकों ने स्कूल भवनों की कमी और जर्जर स्थिति का मुद्दा उठाया तो सत्ता पक्ष के विधायक भी विपक्षी सदस्यों के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। इस विषय पर बहस के दौरान जब सदन में गतिरोध बढ़ने लगा तो खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कमान संभाली।
प्रश्नकाल के दौरान राजद विधायक बोगो सिंह ने मुख्यमंत्री के माध्यम से शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि जिन स्थानों पर स्कूल महज दो कमरों में संचालित हो रहे हैं, वहां सरकार जमीन खरीदकर विद्यालय भवन का निर्माण कराए। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में बच्चों की संख्या अधिक है, लेकिन भवन और कमरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। जिसका समर्थन करते हुए बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा ने सदन में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के कई इलाकों में आज भी ऐसी स्थिति है जहां महज दो कमरों में सैकड़ों बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है तो सरकार जमीन खरीदकर विद्यालय भवन का निर्माण क्यों नहीं कराती।
जीवेश मिश्रा ने कहा-कुछ विद्यालयों में सिर्फ दो कमरों में 565 बच्चों की पढ़ाई हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों को शिक्षा दी जा रही है या सिर्फ उन्हें बहलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में ऐसे कई स्कूल हैं जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बीजेपी विधायक जीवेश कुमार ने मुख्यमंत्री से इस मामले में गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब सरकार शिक्षा विभाग के लिए करीब 77 हजार करोड़ रुपये का बजट बना सकती है तो फिर नए विद्यालयों के निर्माण के लिए जमीन खरीदने का प्रावधान क्यों नहीं किया जा सकता।
वहीं जेडीयू विधायक शालिनी मिश्रा ने ध्यानाकर्षण के जरिए राज्य के उच्च शिक्षा विभाग में मैनपावर की भारी कमी का मामला सामने रखा। उन्होंने सदन को बताया कि विभाग में लगभग 85 प्रतिशत पद रिक्त चल रहे हैं, जिससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक व शैक्षणिक कार्यों पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। इस सवाल का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर ने सरकार का पक्ष रखा।उन्होंने माना कि पद खाली हैं, लेकिन सरकार इसे लेकर गंभीर है और जल्द ही इन सभी रिक्त पदों को भरने के लिए नई बहाली प्रक्रिया की शुरुआत की जाएगी।
62 प्रतिशत शिक्षकों की कमी पर जेडीयू विधायक श्याम रजक भड़क गए। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों की बदहाली का मुद्दा उठाया। श्याम रजक ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इन आवासीय विद्यालयों में स्वीकृत पदों के मुकाबले 62 प्रतिशत शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे गरीब और वंचित तबके के बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है। इस पर विभागीय मंत्री लखींद्र पासवान ने जवाब दिया कि बिहार लोक सेवा आयोग को नए शिक्षकों की बहाली के लिए अधियाचना भेजी जा चुकी है।
वहीं, इस मुद्दे पर जब सदन में विधायकों की नाराजगी और बहस बढ़ती दिखी, तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद हस्तक्षेप किया। सीएम सम्राट चौधरी ने इसपर जवाब देते हुए कहा कि ये अति गंभीर है। सदन के सदस्य की चिंता भी गंभीर है। मैं शिक्षा विभाग को इसकी मॉनिटरिंग के लिए कहूंगा। सम्राट चौधरी ने इसके बाद भरोसा दिया कि एक महीने के अंदर शिक्षकों की बहाली पूरी कर ली जाएगी।
साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि जिन स्थानों पर स्कूल भवन नहीं हैं या भवन से जुड़ी समस्या है, वहां समाधान की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा। सम्राट चौधरी ने कहा कि छह महीने के भीतर स्कूल भवनों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा और जहां विद्यालय भवन की परेशानी है, वहां आवश्यक कार्रवाई कर भवन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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