दुबई जेल में 10 साल की सजा काट रहा गोपालगंज का लाल वतन लौटा, सांसद की पहल से मिली आजादी
गोपालगंज: ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान दुबई में हवाई जहाज और प्रतिबंधित क्षेत्र की वीडियो बनाने के आरोप में 10 साल की सजा पाने वाला गोपालगंज का युवक वसीम अकरम आखिरकार तीन महीने बाद सकुशल अपने घर लौट आया है। बेबसी और कड़े कानूनी संकट के बीच वसीम की घर वापसी से उसके परिवार में जश्न का माहौल है, जो किसी त्योहार से कम नहीं है।
वतन लौटते ही वसीम सबसे पहले अपनी रिहाई के सूत्रधार रहे गोपालगंज के सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन से मिलने पहुंचे। सांसद ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया और अपने हाथों से मिठाई खिलाकर इस कामयाबी का जश्न मनाया।
एक छोटी सी गलती और 10 साल की सजा..
रोजगार की तलाश में गोपालगंज के थावे प्रखंड के इंदरवा रफी गांव से दुबई गए वसीम अकरम को अंदाजा भी नहीं था कि एक वीडियो उनकी जिंदगी बदल देगा। 6 मार्च को दुबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।
क्या था आरोप....
ईरान-अमेरिका के बीच जारी भारी तनाव के दौरान वसीम ने दुबई के एक प्रतिबंधित क्षेत्र में हवाई जहाज का वीडियो बना लिया था। सुरक्षा कारणों से इसे बेहद गंभीर मामला माना गया और दुबई की अदालत ने उन्हें सीधे 10 साल की सजा सुना दी। इस खबर ने गोपालगंज में रह रहे उनके बूढ़े माता-पिता को झकझोर कर रख दिया था।
सांसद की पहल और भारत सरकार का एक्शन..
निराशा के इस दौर में वसीम के परिवार ने स्थानीय सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन से मदद की गुहार लगाई। मामला संवेदनशील था, इसलिए सांसद ने बिना देर किए सीधे विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा।
त्रिकोणीय कूटनीति:
भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और दुबई प्रशासन के बीच लगातार बैठकों और कानूनी समन्वय का दौर चला।
सफल प्रयास:
भारत सरकार के कूटनीतिक दबाव और सांसद की लगातार पैरवी का असर हुआ कि तीन महीने के भीतर ही वसीम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
भरोसा था कि मेरा देश मुझे अकेला नहीं छोड़ेगा..
सांसद आवास पर भावुक हुए वसीम अकरम ने जेल के उन कठिन दिनों को याद करते हुए कहा, "वहाँ कई बार मेरी उम्मीदें टूटने लगी थीं, लेकिन दिल में एक विश्वास था कि मेरा देश मुझे अकेला नहीं छोड़ेगा। मैं सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन, विदेश मंत्रालय और भारत सरकार का जीवनभर आभारी रहूँगा।
वहीं, सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने इसे पूरे देश की सामूहिक जीत बताते हुए कहा-जैसे ही मुझे जिले के इस बेटे की परेशानी का पता चला, मेरी चिंता बढ़ गई थी। हमने तत्काल विदेश मंत्रालय के जरिए कूटनीतिक प्रयास शुरू किए। आज वसीम की सुरक्षित वापसी पूरे देश के सामूहिक प्रयास और विश्वास की जीत है।"
निष्कर्ष: उम्मीद और भरोसे की जीत
वसीम अकरम की सुरक्षित वापसी यह साबित करती है कि यदि जनप्रतिनिधि और सरकार समय पर सही कदम उठाएं, तो सात समंदर पार फंसे देश के नागरिकों की भी जान और आजादी बचाई जा सकती है। कई महीनों की दुआओं के बाद आज इंदरवा रफी गांव में एक बार फिर खुशियां लौट आई हैं।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट
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