नीतीश आवास पर हलचल तेज, अशोक चौधरी समेत कई नेता मिलने पहुंचे, ललन सिंह से बंद कमरे में मुलाकात, 18 की मीटिंग से पहले...

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना स्थित आवास पर जेडीयू के बड़े नेताओं का आना-जाना लगा हुआ है। इसी कड़ी में सोमवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मंत्री अशोक चौधरी समेत कई नेता नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। 18 सितंबर को जेडीयू की महत्वपूर्ण बैठक है।

समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ताजा ऐलान ने बिहार के सत्ताधारी एनडीए में नई हलचल पैदा कर दी है।  गठबंधन के प्रमुख सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने सावधानी भरा और असहमति वाला रुख अपनाया है। इस बीच जदयू में हलचल तेज हो गई है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना स्थित आवास पर जेडीयू के बड़े नेताओं का आना-जाना लगा हुआ है। इसी कड़ी में सोमवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मंत्री अशोक चौधरी समेत कई नेता नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे।  18 सितंबर को जेडीयू का महत्वपूर्ण प्रबोधन कार्यक्रम प्रस्तावित है और दूसरी ओर समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर एनडीए के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है। ऐसे इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।

नीतीश कुमार से केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी समेत कई नेताओं की मुलाकात को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। मुलाकात के थोड़ी ही देर बाद नीतीश कुमार और ललन सिंह साथ में 7 सर्कुलर रोड से निकले। साथ में ललन सर्राफ भी मौजूद रहे।  नीतीश कुमार अपने आवास पर बैठक करने के बाद सीधे ललन सिंह के आवास पहुंचे। करीब 10 मिनट तक चली इस मुलाकात के बाद नीतीश कुमार वहां से वापस लौट गए। इस मुलाकात को लेकर दोनों नेताओं की ओर से आधिकारिक तौर पर बातचीत के एजेंडे को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन सियासी हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) समेत कई अहम मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श हुआ।

वहीं जेडीयू ने 18 सितंबर को विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों के लिए प्रबोधन कार्यक्रम यानी ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया है। इसका आधिकारिक उद्देश्य सदस्यों को विधानसभा के नियमों, प्रक्रियाओं और सदन में प्रभावी ढंग से मुद्दे उठाने की जानकारी देना बताया गया है। इसी बीच जेडीयू के नाम को बदलकर जनता दल नीतीश यानी JDN करने की चर्चा भी तेज हुई है। संजय झा की ओर से नीतीश कुमार के नाम को पार्टी की पहचान से जोड़ने का सुझाव सामने आया है।

बता दें कि मुंबई में ‘सेवा संकल्प अभियान’ कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि UCC विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाएगा। साथ ही एक देश-एक कानून की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम होगा। उत्तराखंड में पहले ही UCC लागू हो चुका है और अब अन्य NDA शासित राज्यों में भी इसे लागू करने की समय-सीमा तय कर दी गई है। लेकिन बिहार में यह ऐलान गठबंधन के सहयोगियों के लिए असहज साबित हुआ है।

अमित शाह के बयान के तुरंत बाद जेडीयू ने अपना रुख साफ कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने साफ कहा कि बिहार में UCC किसी भी कीमत पर लागू नहीं होगा। उन्होंने याद दिलाया कि संसद में जब UCC से संबंधित बिल आया था, तब जेडीयू ने उसका समर्थन किया था, लेकिन नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया था कि इसे बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी अमित शाह से मुलाकात कर पार्टी का पक्ष रखने का संकेत दिया है। पार्टी का कहना है कि बिना व्यापक परामर्श और ड्राफ्ट के कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी सतर्क रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक संरचना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग के लोगों की अपनी परंपराएं और रीति-रिवाज हैं। चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि पार्टी समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। वे चाहते हैं कि पहले ड्राफ्ट सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का आकलन हो और व्यापक चर्चा के बाद ही पार्टी अपना अंतिम स्टैंड तय करे।