चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, TMC का नाम और चुनाव चिह्न किया फ्रीज

मुख्य चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहे सिंबल विवाद पर अपना अंतरिम आदेश जारी कर दिया है

नई दिल्ली : मुख्य चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहे सिंबल विवाद पर अपना अंतरिम आदेश जारी कर दिया है। चुनाव आयोग ने टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुटों को मान्यता दे दी है, जिसमें से एक का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे का अरूप रॉय कर रहे हैं। आयोग ने पैरा 15 के तहत इस विवाद पर अंतिम फैसला करेगा। अंतिम फैसले तक कोई भी गुट मौजूदा उपचुनावों में 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम या 'फूल और घास' चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

दोनों गुटों को आवंटन के लिए 18 सितंबर को सुबह 11 बजे तक 3 पसंदीदा नाम व 3 फ्री-सिंबल विकल्प जमा करने होंगे - चुनाव आयोग

वहीं दोनों गुटों को चुनाव आयोग द्वारा आवंटन के लिए 18 सितंबर को सुबह 11 बजे तक तीन पसंदीदा नाम और तीन फ्री-सिंबल विकल्प जमा करने होंगे। चुनाव आयोग ने एक अंतरिम आदेश में टीएमसी के दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आयोग ने तृणमूल के दोनों गुटों से कहा है कि वे बंगाल विधानसभा उपचुनाव के लिए आयोग द्वारा बताए गए चुनाव चिह्नों में से कोई एक चिह्न और पार्टी का कोई दूसरा नाम चुनें।

उपचुनावों के लिए क्या हैं अंतरिम आदेश

- चुनाव आयोग ने पिछले मामलों की परंपरा के अनुसार आदेश दिया है कि अंतिम फैसला आने तक कोई भी गुट 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

- कोई भी गुट 'फूल-घास' वाला आरक्षित चुनाव चिन्ह इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

- दोनों गुट अपने लिए नया नाम चुनें, चाहें तो अपने नाम के साथ 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का लिंक जोड़ सकते हैं (जैसे - TMC (Mamata)/TMC (Arup Roy) जैसा)

- इस उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को चुनाव आयोग की फ्री सिंबल की लिस्ट में से अलग-अलग नया चुनाव चिन्ह दिया जाएगा।

- दोनों गुटों को 18 सितंबर 2026 सुबह 11:00 बजे तक अपने गुट के लिए 3 नामों के विकल्प - वरीयता क्रम में, जिसमें से एक को आयोग मंजूरी देगा, आयोग को देना होगा।

- चुनाव आयोग का यह फैसला नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले आया है, जहां दोनों गुट तृणमूल कांग्रेस की पहचान के तहत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।