झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित कृष्णापुर गांव के निवासी आशीष कुमार दास को देश की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस का अगला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त किया गया है। कंपनी के अनुसार, वह 1 अप्रैल 2027 से इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका कार्यकाल पांच वर्षों का प्रस्तावित है, हालांकि यह नियुक्ति कंपनी के शेयरधारकों की स्वीकृति मिलने के बाद प्रभावी होगी।
करीब तीन दशक से इंफोसिस से जुड़े आशीष कुमार दास फिलहाल कंपनी में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल बिजनेस पोर्टफोलियो हेड के रूप में कार्यरत हैं। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार, ग्राहकों के लिए रणनीतिक समाधान, डिलीवरी नेटवर्क और टिकाऊ व्यवसायिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों का नेतृत्व किया है।
एक साधारण ग्रामीण परिवार से निकलकर वैश्विक कॉरपोरेट जगत में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने वाले आशीष की सफलता संघर्ष, अनुशासन और निरंतर मेहनत की कहानी है। पांच भाइयों में सबसे छोटे आशीष बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे। उनके बड़े भाई मानस शंकर रंजन दास के अनुसार, शिक्षा के प्रति उनका समर्पण शुरू से ही अलग था और वे हर शैक्षणिक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते थे।
आशीष ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजनगर के सरकारी एसएस प्लस टू हाई स्कूल से पूरी की, जबकि उच्च शिक्षा के लिए चाईबासा के टाटा कॉलेज का रुख किया। जीवन में कठिन मोड़ तब आया जब 12वीं की पढ़ाई के दौरान उनके पिता का निधन हो गया। पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ते रहे।
इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। नेतृत्व क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए उन्होंने अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम भी पूरा किया। वर्तमान में वे लॉस एंजेलिस में रहकर इंफोसिस के वैश्विक कारोबार से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके अलावा वे संयुक्त राष्ट्र के ग्लोबल इन्वेस्टर्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट अलायंस और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी जुड़े रहे हैं।
राजनगर के एक छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक के शीर्ष पद तक पहुंचना न केवल आशीष कुमार दास की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि झारखंड के लिए भी गर्व का विषय माना जा रहा है। उनकी सफलता राज्य के युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और लगातार प्रयास के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।