देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार, 30 मई 2026 को अपने पद से सेवानिवृत्ति ले ली। सैन्य जीवन के समापन पर उन्होंने अपने कार्यकाल को संतोषजनक बताते हुए कहा कि देश की तीनों सेनाओं की ओर से मिला सम्मान उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है।
सेवानिवृत्ति से पहले नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल में आयोजित समारोह में जनरल चौहान को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान उन्होंने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पुष्पचक्र भी समर्पित किया। समारोह के बाद उन्होंने भारतीय सैन्य सेवा को औपचारिक रूप से विदाई दी।
जनरल चौहान ने कहा कि थल सेना, नौसेना और वायु सेना द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया सम्मान उनके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इसके लिए सशस्त्र बलों का आभार भी व्यक्त किया।
गौरतलब है कि जनरल चौहान का कार्यकाल पहले समाप्त होने वाला था, लेकिन सितंबर 2025 में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनके सेवा विस्तार को मंजूरी दी थी। इसके तहत उन्हें 30 मई 2026 तक या अगले आदेश जारी होने तक पद पर बने रहने की अनुमति दी गई थी।
साल 1981 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने वाले जनरल चौहान का सैन्य करियर चार दशकों से अधिक समय तक फैला रहा। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ जिम्मेदारियां संभालीं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल समेत कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान प्रदान किए गए।
CDS के रूप में उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त संचालन क्षमता और सैन्य एकीकरण को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उनके कार्यकाल में सैन्य संरचनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की गईं।
सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले जनरल चौहान ने संयुक्त वायु रक्षा सिद्धांत (Joint Air Defence Doctrine) जारी किया था। एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय ने इसे सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता, समन्वय और संयुक्त तैयारी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।
इसके अलावा, 25 मई को उन्होंने चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी की अंतिम बैठक की अध्यक्षता भी की थी। इस तरह जनरल अनिल चौहान ने अपने लंबे और उल्लेखनीय सैन्य सफर का समापन करते हुए भारतीय रक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान की विरासत छोड़ी है।