झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सदन की कार्यवाही पर भारी पड़ गया। प्रश्नकाल की शुरुआत के साथ ही विपक्ष ने JPSC समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा। मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई और लगातार विरोध के चलते प्रश्नकाल की कार्यवाही प्रभावित रही।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने परीक्षा संबंधी मामलों की कोर्ट की निगरानी में CBI जांच कराने की मांग रखी। इसके समर्थन में विपक्षी विधायक वेल में पहुंचे और नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष ने विशेष रूप से JPSC PT परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग उठाई। विरोध के दौरान विधायकों ने रिपोर्टिंग टेबल थपथपाकर भी सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। लगातार शोर-शराबे के कारण प्रश्नकाल सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सका।
विपक्ष के विरोध पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि इस मुद्दे पर कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में पहले ही चर्चा हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उस बैठक में नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे और सरकार ने स्पष्ट किया था कि अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष अपनी बात विस्तार से रख सकता है। मंत्री ने कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर जवाब देने के लिए तैयार है, इसलिए सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है।
इसी बीच कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने जांच के मुद्दे पर सरकार पर भरोसा रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों से संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। इससे सत्ता पक्ष की ओर से आंदोलनकारी छात्रों के साथ बातचीत के जरिए रास्ता निकालने का संकेत मिला।
हालांकि, विवाद उस समय और बढ़ गया जब मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने JPSC की शुरुआती परीक्षाओं के परिणामों का संदर्भ देते हुए विपक्ष पर सवाल उठाए और कथित तौर पर उनके रिश्तेदारों की सरकारी नौकरियों का मुद्दा उठाया। इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखे हो गए।
लगातार जारी हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। इस घटनाक्रम के साथ JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब विधानसभा के भीतर भी प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है।