झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली सरकारी एंबुलेंस व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में एंबुलेंस या तो तकनीकी खराबी के कारण संचालन से बाहर हैं या फिर अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर चुकी हैं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें आपात स्थिति में समय पर सरकारी सुविधा नहीं मिलने के कारण निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है।
राजधानी रांची की तस्वीर सबसे अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। जिले के लिए उपलब्ध 55 सरकारी एंबुलेंस में से लगभग 27 अब उपयोग योग्य नहीं बची हैं। कई वाहन सदर अस्पताल, रिम्स और विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के परिसरों में लंबे समय से निष्क्रिय खड़े हैं। कुछ एंबुलेंस इतनी उपेक्षा का शिकार हो चुकी हैं कि उनके आसपास झाड़ियां उग आई हैं, जबकि कुछ अपेक्षाकृत नई बड़ी एंबुलेंस भी रखरखाव के अभाव में जंग खाती दिखाई दे रही हैं।
जो एंबुलेंस अभी भी सड़कों पर चल रही हैं, वे भी अत्यधिक उपयोग के कारण अपनी क्षमता से कहीं अधिक दूरी तय कर चुकी हैं। नियमित सर्विस और समय पर मरम्मत नहीं होने से इन वाहनों में लगातार तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। रांची के बजरा स्थित एक निजी सर्विस सेंटर में भी कई 108 एंबुलेंस लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। सर्विस सेंटर से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार कुछ वाहन एक महीने से भी अधिक समय से वहीं खड़े हैं।
राज्यभर की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 543 सरकारी एंबुलेंस में से 80 से अधिक फिलहाल सड़क पर उतरने की स्थिति में नहीं हैं। कई वाहनों में वेंटिलेटर या तो मौजूद नहीं हैं या खराब पड़े हैं। आधे से अधिक एंबुलेंस आवश्यक इमरजेंसी किट के बिना संचालित हो रही हैं। वहीं बड़ी संख्या में वाहनों में टूटे शीशे, खराब मॉनिटर और क्षतिग्रस्त दरवाजे जैसी खामियां भी सामने आई हैं, जिनमें कुछ दरवाजों को अस्थायी रूप से रस्सी से बांधकर चलाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन पहले सम्मान फाउंडेशन के जिम्मे था। कम लागत पर अनुबंध मिलने के कारण वाहनों के रखरखाव पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा सका, जिसके परिणामस्वरूप धीरे-धीरे बड़ी संख्या में एंबुलेंस खराब होती चली गईं। बाद में सरकार ने एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया, लेकिन नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी होने तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी फिलहाल उसी संस्था के पास बनी हुई है।
इधर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए 720 नई एंबुलेंस खरीदने का निर्णय लिया है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को एक महीने के भीतर निविदा प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। प्रस्तावित बेड़े में एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS), बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और पेशेंट ट्रांसपोर्ट व्हीकल (PTV) श्रेणी की एंबुलेंस शामिल होंगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नए वाहनों के शामिल होने के बाद विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और सुलभ हो सकेगी।