रांची: कांग्रेस के गोवा, दमन एवं दादरा नगर हवेली प्रभारी और पूर्व मंत्री मानिक राव ठाकरे ने कथित राम मंदिर दान अनियमितता मामले को लेकर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में चल रही जांच के बावजूद अब तक न तो भाजपा नेतृत्व और न ही उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में कोई स्पष्ट जवाबदेही तय की है। प्रेस वार्ता में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, महासचिव सह मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव, महासचिव राजीव रंजन, वरिष्ठ नेता शाहजादा अनवर, सोनल शांति और राजन वर्मा भी मौजूद थे। ठाकरे ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट में कई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ था, तो इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने पूछा कि यदि सब कुछ पारदर्शी और नियमसम्मत था, तो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को इस्तीफा क्यों देना पड़ा। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पदों पर बैठे लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखी गई है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच से कराई जाए। उन्होंने कहा कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और अन्य कथित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
राव ठाकरे ने आगे कहा कि वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों और वित्तीय विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक नया पारदर्शी ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही मंदिर को प्राप्त चंदे, चढ़ावे, जमीन की खरीद-बिक्री और विभिन्न आयोजनों पर हुए खर्च का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी उन्होंने उठाई। उन्होंने दावा किया कि एसआईटी अब मंदिर से जुड़े बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है। कांग्रेस के अनुसार, 22 जनवरी 2024 को हुए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में लगभग 8,000 मेहमानों के लिए करीब 113 करोड़ रुपये खर्च किए जाने और 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये खर्च होने के आरोप सामने आए हैं। इसके अलावा फर्जी रसीदों और नकद चढ़ावे में हेराफेरी के भी आरोप लगाए गए हैं। ठाकरे ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट में ट्रस्ट और उसके बैंकिंग पार्टनर भारतीय स्टेट बैंक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने दावा किया कि जांच में 70 ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें नोट गिनने वाले कर्मचारी कथित रूप से नकदी को कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाकर ले जाते दिखे। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी निगरानी होने के बावजूद संबंधित कक्ष में आने-जाने वालों की अनिवार्य तलाशी नहीं ली जाती थी। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद एसआईटी ने केवल आठ कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की है, जबकि बड़े स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था हैं और उनकी आस्था के नाम पर किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता को छिपाया नहीं जाना चाहिए।