JSSC CGL केस में बड़ा खुलासा! छात्रों से लाखों की ठगी, कई IRB जवान गिरफ्तार

JSSC CGL केस में बड़ा खुलासा! छात्रों से लाखों की ठगी, कई IRB जवान गिरफ्तार

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की अक्टूबर 2024 में आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ने एक अलग तस्वीर पेश की है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने अपनी जांच में स्पष्ट किया है कि उसे प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला। जांच के अनुसार यह मामला अभ्यर्थियों को परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का झांसा देकर ठगी करने से जुड़ा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इस कथित नेटवर्क में बड़ी संख्या में भारतीय रिजर्व बटालियन (IRB) के जवान शामिल पाए गए, जबकि एक होमगार्ड कर्मी का नाम भी जांच में सामने आया है।

हालांकि, इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने यह स्वीकार किया कि परीक्षा में पूछे गए 66 प्रश्न ऐसे थे, जो अभ्यर्थियों को पहले बताए गए संभावित प्रश्नों से मेल खाते थे। इसके बावजूद SIT ने भी प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि नहीं की। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित "गेस पेपर" किसने तैयार किया और उसकी जानकारी परीक्षार्थियों तक कैसे पहुंची। इस पहलू पर अब तक कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका है।

CGL परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पेपर लीक का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। इन्हीं आरोपों के आधार पर राज्य सरकार ने तत्कालीन CID महानिदेशक अनुराग गुप्ता के नेतृत्व में जांच का आदेश दिया था। बाद में इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने अपना निर्णय दिया, जिसके बाद सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी। हालांकि, परीक्षा पर सवाल उठाने वाले अभ्यर्थियों ने जांच रिपोर्ट पर लगातार असहमति जताई।

SIT की जांच में यह तथ्य सामने आया कि कुल 28 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले नेपाल ले जाया गया था। वहां उन्हें प्रश्नपत्र देने का दावा किया गया, लेकिन जांच के अनुसार उन्हें वास्तविक प्रश्नपत्र नहीं मिला। इसके बजाय सामान्य अध्ययन (General Studies) से जुड़े संभावित प्रश्नों के उत्तर याद कराए गए। नेपाल गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए। इस मामले में हाईकोर्ट ने इन 10 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर CID जांच पूरी होने तक रोक लगा दी है।

फॉरेंसिक जांच के आधार पर SIT ने पाया कि प्रेमलाल ठाकुर, अनिल कुमार, उपेंद्र राउत और रामचंद्र मंडल के मोबाइल से मिले स्क्रीनशॉट में वास्तविक प्रश्नपत्र नहीं था। उनमें केवल सामान्य अध्ययन के 187 संभावित उत्तर दर्ज थे। बाद में जांच में पाया गया कि इनमें से केवल 66 उत्तर ही वास्तविक प्रश्नपत्र के सेट 'A' के प्रश्नों से मेल खाते थे, जबकि बाकी उत्तर परीक्षा में उपयोगी नहीं थे।

जांच के दौरान IRB कांस्टेबल कुंदन कुमार उर्फ मंटू के मोबाइल फोन से एक हस्तलिखित सूची की तस्वीर मिली, जिसमें 28 अभ्यर्थियों और उनके एजेंटों के नाम दर्ज थे। वहीं मुख्य आरोपी संदीप त्रिपाठी उर्फ शशिभूषण दीक्षित की डायरी से भी उम्मीदवारों और एजेंटों से संबंधित जानकारी मिली। जांच में यह भी सामने आया कि सभी 28 अभ्यर्थियों की लोकेशन बिहार के मोतिहारी और रक्सौल क्षेत्र में दर्ज हुई थी। इसी अवधि में संदीप त्रिपाठी, विवेक रंजन, बबलू और हरि सिंह उर्फ विनय साह की लोकेशन भी इन्हीं इलाकों में पाई गई, जिससे जांच एजेंसियों ने इनके बीच संपर्क होने की पुष्टि की।

नेपाल जाने वाले सफल 10 अभ्यर्थियों में से चार; अरविंद कुमार, विभूति अमन, दिवाकर देन और उपेंद्र यादव ने जांच के दौरान वीरगंज जाने की बात स्वीकार की, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें कोई प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं कराया गया था। वहीं दयानंद यादव ने बयान दिया कि हरि सिंह उर्फ विनय साह ने उन्हें हाथ से लिखे कुछ संभावित उत्तर दिखाए थे।

पूरे मामले में IRB-08 (गोड्डा) के पांच जवानों; कुंदन कुमार, गौरव कुमार, अभिलाष कुमार, कृष्णा स्नेही और अखिलेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। इनमें कृष्णा स्नेही स्वयं भी CGL परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों में शामिल था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन लोगों ने प्रश्नपत्र दिलाने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से धन की वसूली की। हालांकि, जांच के दौरान किसी भी आरोपी के पास से मूल प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ, जिसके आधार पर CID और SIT दोनों ने इसे पेपर लीक नहीं, बल्कि संभावित प्रश्नों के नाम पर ठगी का मामला माना।

आर्थिक लेन-देन की जांच में भी महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए। CID के अनुसार, IRB जवान कुंदन कुमार उर्फ मंटू की पत्नी कंचन कुमारी के SBI और ICICI बैंक खातों में परीक्षार्थियों से रकम जमा होने के प्रमाण मिले। इसके अलावा मुख्य आरोपी संदीप त्रिपाठी उर्फ शशिभूषण दीक्षित के YES बैंक खाते में अभ्यर्थियों से लगभग 8.83 लाख रुपये जमा होने का रिकॉर्ड मिला। वहीं कौशलेश कुमार उर्फ राहुल के एक्सिस बैंक खाते में भी अभ्यर्थियों से पैसे प्राप्त होने के साक्ष्य जांच एजेंसी को मिले।

CID की जांच में IRB के कई जवानों, एक होमगार्ड कर्मी, असम राइफल्स के एक जवान तथा बिहार और उत्तर प्रदेश के कई अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की भूमिका और इसके संचालन के तरीके की आगे भी पड़ताल कर रही हैं।