झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। मामले की पड़ताल कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित सभी 2204 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस के तहत अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन किया जा सके।
नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची स्थित CID मुख्यालय पहुंचकर अपनी-अपनी कार्बन कॉपी जमा कर रहे हैं। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों को व्यवस्थित रूप से संकलित कर आगे की तकनीकी जांच की तैयारी में जुटी है।
सूत्रों के अनुसार, CID के पास पहले से JPSC कार्यालय से जब्त की गई मूल OMR शीट मौजूद हैं। अब इन मूल प्रतियों का अभ्यर्थियों द्वारा जमा कराई गई कार्बन कॉपी से मिलान किया जाएगा। इस प्रक्रिया में फॉरेंसिक विशेषज्ञों और तकनीकी टीम की सहायता ली जाएगी, जो उत्तरों, रोल नंबर, हस्ताक्षर सहित अन्य महत्वपूर्ण विवरणों की बारीकी से जांच करेगी।
जांच के दौरान यदि किसी OMR शीट में मूल प्रति और कार्बन कॉपी के बीच अंतर, ओवरराइटिंग, छेड़छाड़ या किसी अन्य प्रकार की संदिग्ध विसंगति सामने आती है, तो संबंधित अभ्यर्थी को चिन्हित किया जाएगा। ऐसे मामलों में CID आगे की पूछताछ के लिए समन जारी कर सकती है और आवश्यकता पड़ने पर विस्तृत जांच भी की जाएगी।
CID का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इसी कारण प्रत्येक दस्तावेज का वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर परीक्षण किया जा रहा है, ताकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता या हेराफेरी हुई हो तो उसे प्रमाण सहित सामने लाया जा सके।
इस कार्रवाई के बाद परीक्षा में कथित तौर पर पैरवी या सिंडिकेट के जरिए सफलता हासिल करने के आरोपों से जुड़े लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। जांच एजेंसी का फोकस अब हर उस पहलू की गहन पड़ताल पर है, जिससे कथित गड़बड़ियों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।