केंद्र सरकार के प्रस्तावित खनिज संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड की राजनीति में हलचल बढ़ती जा रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) अब इस मुद्दे को पार्टी संगठन के स्तर पर उठाने की तैयारी में है। इसके लिए 20 अगस्त को रांची के हरमू स्थित सोहराय भवन में केंद्रीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। माना जा रहा है कि इसी बैठक में विधेयक के विरोध को लेकर पार्टी के अगले चरण की दिशा तय होगी।
बैठक में JMM के केंद्रीय नेतृत्व के साथ जिलों के प्रमुख पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। सभी जिलाध्यक्ष, जिला सचिव और संयोजकों को बुलाया गया है। इसके अलावा रांची महानगर के अध्यक्ष और सचिव भी बैठक में हिस्सा लेंगे। इस व्यापक भागीदारी के जरिए पार्टी इस मुद्दे को संगठन के निचले स्तर तक ले जाने की तैयारी में है।
केंद्रीय समिति की बैठक में विधेयक के प्रावधानों का विस्तृत आकलन किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व यह समझने की कोशिश करेगा कि प्रस्तावित बदलाव झारखंड के खनिज संसाधनों, राजस्व और राज्य के व्यापक हितों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं। JMM का मानना है कि खनिज संपदा झारखंड की अर्थव्यवस्था और राज्य के हितों से सीधे जुड़ी हुई है। ऐसे में विधेयक के संभावित प्रभावों पर चर्चा के बाद ही विरोध के स्वरूप और उसकी व्यापकता को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पार्टी पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखना चाहती। बैठक में जनजागरूकता अभियान से लेकर धरना-प्रदर्शन तक अलग-अलग चरणों में आंदोलन चलाने की रूपरेखा पर विचार किया जाएगा। JMM की रणनीति जरूरत के अनुसार आंदोलन को और व्यापक बनाने की है। पार्टी की ओर से आर्थिक नाकेबंदी जैसे कदम की संभावना भी जताई जा चुकी है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय केंद्रीय समिति की बैठक के बाद ही सामने आएगा।
आंदोलन के उग्र रूप लेने की स्थिति में झारखंड से दूसरे राज्यों तक होने वाली खनिजों की ढुलाई को प्रभावित करने की चेतावनी भी पार्टी की ओर से दी गई है। हालांकि, किन इलाकों में, किस स्तर पर और कब से ऐसे कदम उठाए जाएंगे, इसका फैसला अभी बाकी है।
अब राजनीतिक नजरें 20 अगस्त को होने वाली JMM केंद्रीय समिति की बैठक पर टिक गई हैं। बैठक में तय होने वाली रणनीति से यह स्पष्ट होगा कि खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ पार्टी का विरोध किस दिशा में आगे बढ़ेगा और क्या यह मुद्दा राज्यव्यापी राजनीतिक आंदोलन का रूप लेगा।