झारखंड में प्रॉपर्टी खरीदना हुआ महंगा! रजिस्ट्री पर अब देना होगा 10% अतिरिक्त सरचार्ज

झारखंड में प्रॉपर्टी खरीदना हुआ महंगा! रजिस्ट्री पर अब देना होगा 10% अतिरिक्त सरचार्ज

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 20, 2026, 10:51:00 AM

झारखंड सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में भूमि और भवन के हस्तांतरण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने 'झारखंड नगरपालिका भूमि/भवन स्थानांतरण अधिभार नियमावली, 2026' लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत और अधिसूचित औद्योगिक नगरी की सीमा में आने वाली किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री या हस्तांतरण पर अतिरिक्त अधिभार देना होगा। इस फैसले से शहरी क्षेत्रों में संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों की लागत बढ़ जाएगी।

नई नियमावली के अनुसार, किसी भी भूमि या भवन के निबंधन के दौरान देय स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क की कुल राशि का 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज के रूप में लिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी संपत्ति की रजिस्ट्री में स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क मिलाकर एक लाख रुपये बनते हैं, तो खरीदार को इसके अलावा 10 हजार रुपये अधिभार के रूप में भी जमा करने होंगे।

सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की व्यवस्था की है। संपत्ति का निबंधन पूरा होने से पहले संबंधित निबंधन पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से अधिभार की राशि वसूलेंगे। यदि किसी कारण से रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है, तो निबंधन शुल्क की तरह अधिभार की राशि भी वापस कर दी जाएगी। वहीं, यदि किसी नगरपालिका क्षेत्र की संपत्ति का निबंधन दूसरे कार्यालय में कराया जाता है, तब भी संबंधित निबंधन अधिकारी ही इस अतिरिक्त शुल्क की वसूली सुनिश्चित करेंगे।

ऑनलाइन व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग अपने पोर्टल पर आवश्यक तकनीकी प्रावधान विकसित करेगा। दूसरी ओर, नगर विकास एवं आवास विभाग अलग पेमेंट गेटवे तैयार करेगा, जिसे इस पोर्टल से जोड़ा जाएगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) पूरी प्रक्रिया के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा।

नियमावली में कुछ राहत के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। यदि किसी विशेष मामले में राज्य सरकार स्टाम्प शुल्क या निबंधन शुल्क में छूट प्रदान करती है, तो उसी अनुपात में यह अधिभार भी स्वतः समाप्त माना जाएगा। इसके अलावा अधिभार से प्राप्त राशि को संबंधित नगरपालिका या औद्योगिक नगरी द्वारा खोले गए निर्धारित बैंक खाते में सीधे जमा किया जाएगा।

सरकार के अनुसार, इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग संबंधित शहरी निकाय अपने विकास कार्यों और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए कर सकेंगे। निधि के उपयोग और लेखांकन की प्रक्रिया झारखंड वित्त नियमावली, कोषागार संहिता तथा नगरपालिका लेखा नियमों के अनुरूप संचालित होगी, ताकि धन के उपयोग में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही निबंधन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि शहरी क्षेत्रों में होने वाले प्रत्येक भूमि और भवन हस्तांतरण पर निर्धारित अधिभार की पूर्ण वसूली हो।

नई नियमावली के क्रियान्वयन के दौरान यदि किसी प्रकार की व्यावहारिक समस्या सामने आती है, तो नगर विकास एवं आवास विभाग आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर उसका समाधान करेगा। इसके लागू होते ही इस विषय से संबंधित पूर्व में जारी सभी संकल्प, परिपत्र और आदेश स्वतः प्रभावहीन हो जाएंगे। हालांकि, नियमावली लागू होने से पहले लिए गए वैध निर्णयों को यथावत मान्यता दी जाएगी।