पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले की जांच का दायरा झारखंड तक बढ़ाते हुए साहिबगंज जिले के बरहरवा थाना क्षेत्र स्थित ग्वालखोर के वेवतपुर इलाके से अर्पिता सरकार नामक युवती को हिरासत में लिया है। एसटीएफ का कहना है कि अर्पिता का नाम उस जांच के दौरान सामने आया, जो बर्दवान जिले से गिरफ्तार 24 वर्षीय हमीम मंडल से जुड़े मामले में की जा रही है। हिरासत में लेने के बाद उसे पश्चिम बंगाल ले जाया गया, जहां अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की गई।
इससे पहले शुक्रवार को एसटीएफ ने बर्दवान के रेनेसां हाउसिंग कॉम्प्लेक्स से हमीम मंडल को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, उस पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित संपर्क रखने का संदेह है। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्री बरामद होने का दावा किया गया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि वह स्वयं को टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़ा पेशेवर बताकर गतिविधियां संचालित कर रहा था।
जांच एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि हमीम मंडल के संपर्क जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों तक हो सकते हैं। अधिकारियों को संदेह है कि उसके तार वर्ष 2019 के पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड सज्जाद भट और अन्य संदिग्ध तत्वों से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है।
एसटीएफ के मुताबिक, प्रारंभिक जांच के दौरान कुछ ऐसे इनपुट भी मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि आरोपी के पास पश्चिम बंगाल के प्रमुख राजनीतिक नेताओं और कुछ संगठनों से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों से संबंधित जानकारियां मौजूद थीं। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन जानकारियों का उद्देश्य केवल संग्रह करना था या संभावित लक्ष्यों की रेकी की जा रही थी।
हमीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद उसके संपर्कों की कड़ी खंगालने के दौरान अर्पिता सरकार का नाम सामने आया। अधिकारियों का मानना है कि उससे पूछताछ के जरिए कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, संपर्क सूत्रों और गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, अब तक अर्पिता की भूमिका को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि कथित नेटवर्क का दायरा कितना व्यापक था और इसके संबंध किन-किन राज्यों तथा व्यक्तियों तक फैले हुए थे। उल्लेखनीय है कि जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही होगी।