झारखंड हाईकोर्ट परिसर में प्रस्तावित फुटबॉल ग्राउंड को लेकर अधिवक्ताओं और न्यायालय प्रशासन के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ ने पहले ही लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी और सोमवार को अदालत की कार्यवाही शुरू होते ही मामले को मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान एडहॉक कमिटी के अध्यक्ष ऋतू कुमार और महासचिव नवीन कुमार ने अदालत को बताया कि यदि परिसर में उपलब्ध खाली जमीन का उपयोग किया जाना है, तो उसे खेल मैदान के बजाय अधिवक्ताओं के हित में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वकीलों के लिए उपलब्ध चैंबर और बैठने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, खासकर नए अधिवक्ताओं को कार्य करने के लिए आवश्यक स्थान की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि खाली भूमि पर फुटबॉल ग्राउंड बनाने के बजाय नए चैंबर और अधिवक्ताओं के बैठने की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि न्यायिक कार्य से जुड़े लोगों को सुविधाएं मिल सकें।
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि उसे इस प्रस्ताव की जानकारी नहीं है। इसके बाद अदालत ने पूरे मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए रजिस्ट्रार जनरल से विस्तृत जानकारी और अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। फिलहाल अदालत ने मामले पर आगे की कार्रवाई से पहले प्रशासनिक पक्ष का जवाब तलब किया है।