NEET UG पुनर्परीक्षा 2026 के परिणाम को लेकर उठे विवाद ने अब न्यायिक मोड़ ले लिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने एक अभ्यर्थी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को संबंधित उम्मीदवार की मूल OMR उत्तर-पत्रिका सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अदालत ने इस दस्तावेज को अगली सुनवाई से पहले उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि अंकों में कथित विसंगति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जस्टिस आनंद सेन की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान टेस्ट बुकलेट सीरियल नंबर 265208914 तथा रोल नंबर 2603107066 से संबंधित अभ्यर्थी लक्ष्य सिंह की मूल OMR शीट पेश करने को कहा। मामले की सुनवाई 28 जुलाई को हुई थी और अब इसकी अगली तारीख 4 अगस्त तय की गई है।
याचिकाकर्ता लक्ष्य सिंह का कहना है कि पुनर्परीक्षा के बाद NTA की वेबसाइट पर उपलब्ध OMR शीट के आधार पर उनके लगभग 660 अंक बन रहे थे। हालांकि, आधिकारिक परिणाम घोषित होने पर उन्हें केवल 116 अंक आवंटित किए गए। इसी बड़े अंतर को आधार बनाकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
अभ्यर्थी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि वेबसाइट पर प्रदर्शित OMR शीट का स्क्रीनशॉट और स्कैन कॉपी पहले ही सुरक्षित कर ली गई थी। उनका तर्क था कि यदि ऑनलाइन उपलब्ध OMR के अनुसार अधिक अंक बन रहे हैं तो अंतिम परिणाम में इतने कम अंक कैसे दर्ज किए गए। उन्होंने अदालत से मूल OMR रिकॉर्ड मंगाने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने NTA को सीलबंद लिफाफे में मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने NTA से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि वेबसाइट पर प्रदर्शित OMR और अंतिम परिणाम के बीच इतना बड़ा अंतर किस कारण से उत्पन्न हुआ। अदालत ने एजेंसी से इस विसंगति पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव और बजरंग कुमार, झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) की ओर से अरूप कुमार मेहता तथा राज्य सरकार की ओर से तरुण कुमार मेहता अदालत में उपस्थित हुए।
NEET परीक्षा से जुड़े विवाद पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन हुए, जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी लंबे समय तक आंदोलन चला। इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। साथ ही परीक्षा संबंधी अपराधों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संबंधित कानून में संशोधन का प्रस्ताव भी संसद में पेश किया गया है।