दुर्लभ बीमारी ने तोड़ी कमर, 35 हजार के मासिक इंजेक्शन के लिए तरस रहा परिवार

दुर्लभ बीमारी ने तोड़ी कमर, 35 हजार के मासिक इंजेक्शन के लिए तरस रहा परिवार

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 22, 2026, 10:14:00 AM

जामताड़ा जिले के फतेहपुर प्रखंड की सिमलडूबी पंचायत के मंझलाडीह गांव की रहने वाली 34 वर्षीय छवि भंडारी पिछले छह वर्षों से एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी टाकायासु आर्टेराइटिस का सामना कर रही हैं। लंबे समय से चल रहे इलाज और लगातार बढ़ते चिकित्सीय खर्च ने उनके परिवार को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। अब स्थिति यह है कि आवश्यक दवाइयों और इलाज का खर्च उठाना भी परिवार के लिए बेहद कठिन हो गया है।

छवि के पति उज्जवल भंडारी गांव में एक छोटे सैलून का संचालन कर परिवार की आजीविका चलाते हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2020 से अब तक पत्नी के उपचार के लिए उन्होंने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों से आर्थिक सहायता और उधार लेकर लाखों रुपये खर्च किए हैं। लगातार प्रयासों के बावजूद अब परिवार की आर्थिक क्षमता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

वर्तमान में छवि का उपचार वेल्लोर के विशेषज्ञ चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार घर से ही जारी है। चिकित्सकों के मुताबिक, टाकायासु आर्टेराइटिस एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रमुख धमनियों, विशेष रूप से महाधमनी (एओर्टा), में सूजन आ जाती है। इस कारण मरीज को सीने और हाथों में लगातार दर्द, उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समय पर और नियमित इलाज नहीं मिलने पर हृदयाघात, हार्ट फेलियर अथवा स्ट्रोक जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

उज्जवल भंडारी ने बताया कि नवंबर 2025 में नई दिल्ली स्थित एम्स के रूमेटोलॉजी विभाग ने छवि के लिए प्रति माह टोसिलिजुमैब 480 मिलीग्राम इंजेक्शन लेने की सलाह दी थी। एम्स द्वारा जारी चिकित्सा दस्तावेजों के अनुसार, एक इंजेक्शन की कीमत लगभग 35,403 रुपये है। चिकित्सकीय अनुमान के मुताबिक इस उपचार को तीन वर्षों तक जारी रखने पर करीब 12.74 लाख रुपये का खर्च आएगा, जो उनके परिवार की आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है।

इसी कारण परिवार ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सरकारी सहयोग मिल जाता है तो उपचार बिना बाधा जारी रह सकेगा और छवि की जान बचाने की उम्मीद बनी रहेगी। परिवार को विश्वास है कि सरकार उनकी परिस्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर मदद करेगी, जिससे एक गंभीर बीमारी से जूझ रही महिला को नया जीवन मिल सके।

जामताड़ा से संतोष कुमार की रिपोर्ट