झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन और भाजपा के प्रदर्शन के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा परिसर में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा के मुख्यमंत्री आवास घेराव और छात्रों के विधानसभा मार्च को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की गई और अब इसकी तस्वीर जनता के सामने स्पष्ट है।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शुरू से ही छात्रों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखे हुए है। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलन एक अधिकार है, लेकिन किसी विवाद का स्थायी समाधान बातचीत से ही संभव है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने छात्रों की करीब 95 फीसदी मांगों को स्वीकार कर लिया है, जबकि कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई।
सुदिव्य कुमार सोनू के अनुसार छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना शामिल था। मंत्री ने कहा कि इस परीक्षा से जुड़ा मामला न्यायिक निगरानी में रहा है और ऐसे में इसे रद्द करने का निर्णय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
उन्होंने दावा किया कि कमेटी के माध्यम से छात्रों को इस स्थिति की जानकारी दी गई थी। मंत्री का आरोप है कि इसके बावजूद भाजपा ने पर्दे के पीछे से छात्रों को इस मुद्दे पर भड़काने का प्रयास किया, जिससे बातचीत के दौरान गतिरोध और गहरा गया।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार और छात्रों के बीच विवाद का मुख्य विषय CBI जांच नहीं, बल्कि JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग थी। उनके मुताबिक इसी बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी और संवाद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
सुदिव्य कुमार ने कहा कि छात्रों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने का पूरा अधिकार है और सरकार इसे नहीं रोकना चाहती। हालांकि उन्होंने जोर दिया कि लंबे समय तक आंदोलन करने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशना अधिक प्रभावी है। उनके अनुसार आंदोलन से गतिरोध पैदा हो सकता है, लेकिन अंतिम समाधान संवाद के माध्यम से ही निकलेगा।
विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों की हिरासत को लेकर मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
मंत्री ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस या पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली मांगों पर कार्रवाई की गई है, जबकि जिन मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप है, उनमें कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की जांच को लेकर संबंधित एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने पर सहमति बनी है।