मेदिनीनगर में बुधवार की शाम संस्कृति, इतिहास और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मासूम आर्ट ग्रुप द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘सोचो कि आजादी के असली नायक कौन रहे थे और बोलो वंदे मातरम’ ने दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर में पहुंचा दिया, जब पलामू की धरती पर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष की मशाल जल रही थी। प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
यह सांस्कृतिक आयोजन संगीत नाटक अकादमी और मेदिनीनगर नगर निगम के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने और महाकवि कालिदास जयंती के अवसर पर देश के 150 शहरों में आयोजित इस विशेष श्रृंखला में मेदिनीनगर भी शामिल रहा।
कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस रित्विक मेहता, मेयर अरुणा शंकर, संगीत नाटक अकादमी के सदस्य नंदलाल नायक, नाट्यकार राकेश रमण, संत मरियम स्कूल के निदेशक एवं मासूम आर्ट ग्रुप के संरक्षक अविनाश देव, भाजपा जिलाध्यक्ष अमित तिवारी, कवि रविशंकर पांडेय, पूर्व सैनिक ब्रजेश शुक्ला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
प्रशिक्षु आईएएस रित्विक मेहता ने कहा कि नाटक के माध्यम से उन्हें पलामू के स्वतंत्रता आंदोलन और उसके ऐतिहासिक योगदान के बारे में नई जानकारियां मिलीं। वहीं मेयर अरुणा शंकर ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इतिहास को जिस जीवंतता के साथ मंच पर प्रस्तुत किया, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। संगीत नाटक अकादमी के सदस्य नंदलाल नायक ने भी कलाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि उचित मंच मिलने पर यह टीम कहीं भी दर्शकों को अपनी प्रस्तुति से बांधे रखने की क्षमता रखती है।
नाटक की कहानी 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पलामू में हुए जनविद्रोह पर आधारित थी। इसमें नीलांबर-पीतांबर, राजा भवानी बक्स राय, परमानंद भोक्ता, रानी चंद्रावती कुंवर समेत चेरो, भोक्ता और खरवार समाज के वीर सेनानियों के अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारियों कॉर्नेल डाल्टन और मेजर मैकडॉनल्ड द्वारा किए गए दमन और अत्याचारों का भी सशक्त चित्रण किया गया।



नाटक को प्रभावशाली बनाने में कलाकारों के अभिनय के साथ तकनीकी टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रकाश व्यवस्था विनय चौहान ने संभाली, जबकि संगीत का संयोजन राजा सिन्हा, विजय राम, सिकंदर कुमार, आनंद रवि और अदनान कासिफ ने किया। मंच सज्जा संजीत प्रजापति और ध्वनि व्यवस्था जीवन प्रकाश के जिम्मे रही, जिसकी दर्शकों ने खूब सराहना की। कार्यक्रम का संचालन शिव शंकर प्रसाद और शालिनी श्रीवास्तव ने किया।
नाटक में राजा भवानी बक्स राय की भूमिका सैकत चटर्जी ने निभाई, जबकि बूढ़ा बाबा के रूप में कामरूप सिन्हा, रंगलाल भेदिया के किरदार में राज प्रतीक पाल, मेजर मैकडॉनल्ड की भूमिका में राहुल कुमार और रानी चंद्रावती कुंवर के रूप में मुनमुन चक्रवर्ती ने अपने अभिनय से विशेष छाप छोड़ी। इनके अलावा उज्ज्वल सिन्हा, अमर्त्य पंडित, अरिंदम पंडित, प्रकाश संगम, संजीव कुमार राम, गिरेंद्र यादव, आनंद प्रजापति, अमर कुमार भांजा, श्यामली घोष, आनंद गुप्ता, कनक लता तिर्की, परिणीता पाल, आदर्श पांडेय, मो. नसीम, शहजादा तालिब, प्रकाश ठाकुर और मुकेश विश्वकर्मा सहित कई कलाकारों ने विभिन्न भूमिकाओं में प्रस्तुति दी। इस आयोजन में अविनाश तिवारी का भी सहयोग रहा।
समारोह के दौरान संगीत नाटक अकादमी के सदस्य नंदलाल नायक, पलामू के स्वतंत्रता आंदोलन पर कई पुस्तकों के लेखक प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. रमेश चंचल, नाट्यकार राकेश रमण, ट्राइबल फैशन डिजाइनर सुमंगल नाग, बॉक्स पापुली के क्रिएटिव हेड सर्वेश मिश्रा, लाइट डिजाइनर विनय चौहान और ध्वनि विशेषज्ञ जीवन प्रकाश को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम ने न केवल पलामू के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया, बल्कि स्थानीय रंगमंच और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिलाई।