टीसी के नाम पर 200 रुपये वसूली और पोशाक राशि में गड़बड़ी का आरोप, स्कूल में हंगामा

जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत उत्क्रमित उच्च विद्यालय कृष्णापुर एक बार फिर चर्चा में है। विद्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने उपायुक्त, जामताड़ा को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत उत्क्रमित उच्च विद्यालय कृष्णापुर एक बार फिर चर्चा में है। विद्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने उपायुक्त, जामताड़ा को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने अपने आवेदन में विद्यालय के पांच शिक्षकों का जिक्र किया है। इनमें प्रभारी प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार, प्रवीर कुमार भूंई, गौतम पैतंडी, गंगाधर यादव और सुमंत रजक शामिल हैं।

क्या हैं आरोप?

शिकायत के अनुसार, शिक्षक प्रवीर कुमार भूंई पर छात्रों को टीसी देने के नाम पर 200-200 रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। वहीं सरकारी पोशाक वितरण की राशि में भी गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय के सभी अभिलेखों और भुगतान रजिस्टर की जांच की जाए। आवेदन में यह भी कहा गया है कि विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकाया जाता है और झूठे केस में फंसाने की बात कही जाती है।

प्रधानाध्यापक का पक्ष: चंदा विवाद है वजह

वहीं दूसरी ओर प्रभारी प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार ने इन आरोपों को चंदा विवाद से जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि कुछ लोग विद्यालय में दुर्गा पूजा के नाम पर तीन साल का बकाया चंदा मांगने आए थे।

मुकेश कुमार के अनुसार, उन्होंने कहा कि पहले पुराने हिसाब को स्पष्ट किया जाए, तब नए साल के चंदे पर बात होगी। इसी बात से नाराज होकर वे लोग धमकी देते हुए चले गए कि आगे देख लेंगे।प्रधानाध्यापक ने बताया कि उस समय उनकी तबीयत खराब थी और वे दवा लेने गए थे, तभी स्कूल में हंगामा शुरू हो गया।

क्या कहते हैं ग्रामीण?

ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की है कि लंबे समय से एक ही विद्यालय में जमे शिक्षकों का स्थानांतरण किया जाए और पूरे मामले की जांच शिक्षा विभाग की टीम से कराई जाए।

जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया के बाद ही मामले पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

जामताड़ा से संतोष कुमार की रिपोर्ट