प्रसूता मौत पर भाजपा का हल्ला बोल, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

प्रसूता मौत पर भाजपा का हल्ला बोल, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 18, 2026, 11:53:00 AM

जामताड़ा सदर अस्पताल में संस्थागत प्रसव के दौरान रीना देवी और उनके नवजात की मौत के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। घटना के एक दिन बाद शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की दो सदस्यीय जांच टीम जामताड़ा पहुंची। टीम में पूर्व मंत्री अमर बाउरी और पूर्व सांसद सुनील सोरेन शामिल थे। दोनों नेताओं ने मृतका के परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और न्याय दिलाने का भरोसा दिया।

परिवार से बातचीत के बाद भाजपा नेताओं ने अस्पताल प्रबंधन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि रीना देवी स्वस्थ अवस्था में स्वयं अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी और नवजात की जान चली गई। नेताओं ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया।

पूर्व मंत्री अमर बाउरी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद राजनीतिक दबाव में भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जिला अध्यक्ष समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है। उनके मुताबिक, भाजपा ऐसे मामलों से डरने वाली नहीं है और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की लड़ाई जारी रखेगी।

अमर बाउरी ने राज्य सरकार से घटना की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस समय पूरा राज्य रथ यात्रा के उत्सव में शामिल था, उसी दौरान एक परिवार मातृत्व की खुशी के बजाय शोक में डूब गया। उन्होंने इस घटना के लिए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

प्रेस वार्ता में पूर्व सांसद सुनील सोरेन ने भी मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यदि किसी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इस घटना में मां और नवजात, दोनों की मौत हुई है, इसलिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

सुनील सोरेन ने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले के सरकारी अस्पताल में ऐसी स्थिति है, तो राज्य के अन्य अस्पतालों की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई।