वन्यजीव तस्करी का खुलासा, ग्राहक बनकर विभाग ने पकड़े तस्कर, 3 गिरफ्तार

धनबाद जिले में वन विभाग ने वन्यजीवों के अंगों और उनसे जुड़े संदिग्ध आर्टिकल की खरीद-बिक्री के मामले में बड़ी कार्रवाई की है।

धनबाद: जिले में वन विभाग ने वन्यजीवों के अंगों और उनसे जुड़े संदिग्ध आर्टिकल की खरीद-बिक्री के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने मेमको मोड़ स्थित एक निजी  होटल के कमरा नंबर 212 में छापेमारी कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झरिया निवासी मोहम्मद शाहबाज खान, बरवाअड्डा निवासी वसीम असगर खान और भूली निवासी शहजादा खुर्रम के रूप में हुई है। मौके से वन्यजीवों से संबंधित कई आर्टिकल बरामद किए गए हैं। वन विभाग को आशंका है कि बरामद सामग्री तेंदुए या पेंगोलिन से संबंधित हो सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक पहचान फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

मामले का खुलासा करते हुए धनबाद के वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) विकास पालीवाल ने बताया कि पिछले सात दिनों से सूचना मिल रही थी कि मेमको मोड़ स्थित एक निजी होटल में कुछ लोगों द्वारा वन्यजीवों से संबंधित आर्टिकल की खरीद-बिक्री की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने एक विशेष टीम का गठन किया और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी शुरू की।

करीब एक सप्ताह तक जानकारी जुटाने और संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद विभाग ने कार्रवाई की योजना बनाई। इसके तहत वन विभाग के अधिकारी ग्राहक बनकर होटल पहुंचे। वहां वन्यजीवों से संबंधित आर्टिकल खरीदने के बहाने आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद होटल के कमरा नंबर 209 में कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को कथित तौर पर रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

डीएफओ विकास पालीवाल के अनुसार, मौके से वन्यजीवों से जुड़े कई संदिग्ध आर्टिकल बरामद किए गए हैं। शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि इनका संबंध तेंदुए या पेंगोलिन से हो सकता है। हालांकि, बिना वैज्ञानिक जांच के बरामद सामग्री के स्रोत और उसकी वास्तविक पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती। वन विभाग ने बरामद आर्टिकल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की बात कही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि सामग्री किस वन्यजीव से संबंधित है और वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत इस मामले में किन धाराओं में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी कितने समय से इस गतिविधि में शामिल थे, उन्हें वन्यजीवों से संबंधित आर्टिकल कहां से मिलते थे और इन्हें किन लोगों को बेचा जाना था। डीएफओ ने बताया कि मामले में संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि इस कथित कारोबार में केवल गिरफ्तार तीन लोग शामिल हैं या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जानकारी जुटाई जा रही है। डीएफओ के मुताबिक, आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सके।

वन्यजीवों के अंगों और उनसे जुड़े उत्पादों की अवैध खरीद-बिक्री वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से गंभीर मामला है। धनबाद में हुई इस कार्रवाई के बाद अब जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि बरामद सामग्री वास्तव में किस वन्यजीव से जुड़ी है और इसका इस्तेमाल या कारोबार किस उद्देश्य से किया जा रहा था। फिलहाल, तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद वन विभाग की जांच जारी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट, पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही इस कथित तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा।

धनबाद से नीतीश की रिपोर्ट