धनबाद जिले के कतरास थाना क्षेत्र में लगातार बढ़ रही भूधंसान की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कोलियरी, आउटसोर्सिंग परियोजनाओं और पूर्व में भूमिगत खनन वाले इलाकों के आसपास बसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जमीन धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। छाताबाद में 7 जुलाई के बाद 6 अगस्त को एक बार फिर भीषण भूधंसान हुआ, जिसमें करीब 20 घर जमींदोज हो गए, जबकि दर्जनों अन्य घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
छाताबाद में 6 अगस्त को हुई भूधंसान की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। भूधंसान के बाद बड़े इलाके में जमीन फट गई और कई जगह सड़क भी क्षतिग्रस्त हो गई। देखते ही देखते करीब 20 घर जमीन में समा गए। वहीं दर्जनों मकान अब भी खतरे की जद में हैं। सैकड़ों लोगों के सामने अपने आशियाने को बचाने और सुरक्षित जगह तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। लेकिन लगातार हो रही भूधंसान की घटनाओं ने लोगों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। छाताबाद के बाद सलेक्टेड गोविंदपुर में भी 3 अगस्त को भूधंसान की घटना सामने आई थी। यहां भी करीब आधा दर्जन घर जमींदोज हो गए थे। लगातार हो रही इन घटनाओं को लेकर अब स्थानीय लोग सुरक्षा और स्थायी पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
छाताबाद में हुई भूधंसान की घटना के लिए स्थानीय लोग पास में संचालित STG आउटसोर्सिंग कंपनी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कंपनी की ओर से की जा रही हैवी ब्लास्टिंग के कारण जमीन में कंपन बढ़ रहा है, जिसके चलते भूधंसान की स्थिति पैदा हुई। आक्रोशित लोगों ने STG आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बड़ी संख्या में लोग कंपनी परिसर पहुंचे और काम को अनिश्चितकाल के लिए बाधित कर धरने पर बैठ गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि DGMS के सुरक्षा नियम मौजूद हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
लोगों का आरोप है कि उत्पादन बढ़ाने की होड़ में भारी ब्लास्टिंग की जा रही है और इसका खामियाजा आसपास रहने वाली आबादी को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने BCCL और आउटसोर्सिंग कंपनी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि भूधंसान के बाद BCCL की ओर से राहत और बचाव को लेकर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि अब तक प्रभावित इलाके का सही तरीके से सर्वे तक नहीं कराया गया और न ही सुरक्षित पुनर्वास की दिशा में ठोस पहल हुई है।
लोगों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र का तत्काल सर्वे कराया जाए, डेंजर जोन को चिन्हित किया जाए और लोगों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाए। साथ ही भूधंसान से प्रभावित परिवारों को उचित क्षतिपूर्ति और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाए। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सुरक्षा, सर्वे, क्षतिपूर्ति और पुनर्वास को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक STG कंपनी का काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा। इलाके में तनाव को देखते हुए CISF और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। लगातार हो रही भूधंसान की घटनाओं ने एक बार फिर कोयला क्षेत्र में सुरक्षा और पुनर्वास के सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और BCCL प्रभावित लोगों की सुरक्षा को लेकर क्या ठोस कदम उठाते हैं।
धनबाद से नीतीश की रिपोर्ट