बारामुड़ी खटाल में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 18 एकड़ सरकारी जमीन की नापी, 200 घरों पर मंडराया बेदखली का खतरा

जिले में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में धनबाद सदर अंचल के बारामुड़ी मौजा स्थित खटाल क्षेत्र में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की।

धनबाद : जिले में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में धनबाद सदर अंचल के बारामुड़ी मौजा स्थित खटाल क्षेत्र में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। अंचल अधिकारी रामप्रवेश कुमार के नेतृत्व में राजस्व टीम ने करीब 18 एकड़ सरकारी जमीन की पैमाइश (नापी) पूरी की। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यहां बने लगभग 200 घरों पर बेदखली का खतरा मंडराने लगा है।

सर्वे के बाद अतिक्रमणवाद और नोटिस की तैयारी

अंचल अधिकारी रामप्रवेश कुमार ने जानकारी दी कि बारामुड़ी खटाल क्षेत्र में लगभग 18 एकड़ सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे की सूचना मिली थी। इसी तथ्य की सत्यता जांचने के लिए अंचल निरीक्षक, राजस्व कर्मचारियों और अंचल अमीन की टीम के साथ जमीन की नापी कराई गई। इसके अलावा, प्रशासनिक टीम ने यह भी बताया कि बारामुड़ी खटाल के रास्ते के उस पार भी कई बड़ी इमारतों द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा किए जाने की सूचना है, जिनकी जांच की जा रही है। साथ ही, आने वाले दिनों में पंपू तालाब और लोको टैंक के आसपास की सरकारी जमीनों का भी सर्वे किया जाएगा।

प्रशासनिक योजना के अनुसार

अतिक्रमणकारियों की पहचान - सर्वे के बाद अवैध कब्जाधारियों को चिह्नित किया जा रहा है।

नोटिस प्रक्रिया - चिह्नित लोगों के खिलाफ अतिक्रमणवाद दायर कर उन्हें सात दिनों का नोटिस दिया जाएगा, जिसमें उन्हें अपना लिखित पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

कार्रवाई की समय-सीमा - प्रशासन का लक्ष्य एक महीने के भीतर अतिक्रमणवाद का निष्पादन कर पूरी जमीन को खाली कराना है।

स्थानीय लोगों का दर्द : 'रोजी-रोटी और मवेशियों को कहां लेकर जाएं?'

प्रशासनिक कार्रवाई से प्रभावित होने वाले स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और मायूस का माहौल है। लोगों का कहना है कि वे मूल रूप से बेकारबांध तालाब के पीछे रहा करते थे, जिन्हें तत्कालीन उपायुक्त डॉ. बीला राजेश के कार्यकाल में इस बारामुड़ी क्षेत्र में बसाया गया था। यहां रहने वाले परिवारों का मुख्य पेशा खटाल चलाना है और उनके पास बड़ी संख्या में मवेशी हैं। 

स्थानीय निवासियों का कहना है

आजीविका का संकट - खटाल ही उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है। यहाँ से हटाए जाने पर उनके सामने रोजी-रोटी और मवेशियों को रखने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी।

बच्चों का भविष्य - लोगों ने पीड़ा जताई कि उनका भविष्य पहले भी एक बार विस्थापन का दर्द झेल चुका है, और अब एक बार फिर उनके बच्चों की पढ़ाई और भविष्य संकट में नजर आ रहा है।

अपनी गुहार लेकर स्थानीय लोग जल्द ही DC से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे हैं

प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि उनकी मानवीय स्थिति, आजीविका और मवेशियों के पालन-पोषण को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक और उचित समाधान निकाला जाए। अपनी गुहार लेकर स्थानीय लोग जल्द ही उपायुक्त (DC) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

धनबाद से युधिष्ठिर महतो की रिपोर्ट