कतरास ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा, 24 घंटे में दो आरोपी गिरफ्तार, SIT की कार्रवाई से हड़कंप

धनबाद: जिले के कतरास थाना क्षेत्र के ईस्ट बसुरिया ओपी अंतर्गत सोरीटांड़-कौशलपुरम के पास हुई सनसनीखेज हत्या की गुत्थी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझा ली है। इस मामले में गठित एसआईटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

धनबाद: जिले के कतरास थाना क्षेत्र के ईस्ट बसुरिया ओपी अंतर्गत सोरीटांड़-कौशलपुरम के पास हुई सनसनीखेज हत्या की गुत्थी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझा ली है। इस मामले में गठित एसआईटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल खून से सना लोहे का पाइप, पत्थर, बाइक, मृतक का मोबाइल, एटीएम कार्ड और अन्य सामान बरामद किया गया है।

इस संदर्भ में रविवार को धनबाद के ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने जानकारी देते हुए बताया कि 23 जुलाई की शाम पुलिस को सूचना मिली थी कि सोरीटांड़, कौशलपुरम के समीप झाड़ियों के पास एक व्यक्ति का शव पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि मृतक के सिर और चेहरे को पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या की गई थी। घटनास्थल से कुछ दूरी पर मृतक की टाटा नेक्सन कार भी बरामद हुई। जांच के दौरान शव की पहचान बरवाअड्डा निवासी 57 वर्षीय जयराम मांझी के रूप में हुई। मृतक की पत्नी की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर ग्रामीण एसपी द्वारा एसआईटी का गठन किया गया। बाघमारा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अजीत विमल के नेतृत्व में छापेमारी कर पुलिस ने तेतुलमारी के खास सिजुआ निवासी कुंदन कुमार और प्रेम चौहान उर्फ पुष्पा को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त खून से सना लोहे का पाइप, पत्थर, मोटरसाइकिल, मृतक का मोबाइल, सिम, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड समेत अन्य कागजात बरामद किए गए। साथ ही दोनों आरोपियों के खून लगे कपड़े और मोबाइल भी पुलिस ने जब्त किए हैं।

पुलिस ने बताया कि आरोपित कुंदन कुमार किसी ऑनलाइन गेमिंग का आदि था और वह किसी प्राइवेट कंपनी में काम करता था। जिससे उसे पैसों की तंगी रहती थी। वहीं मृतक जयराम मांझी एक बीसीसीएल कर्मी था और वह तेतुलमारी में कार्यरत था, दोनों में दोस्ती हुई, लेकिन कुंदन की नजर मृतक के पैसों पर थी और वह उसके पैसों को किसी भी हालत में लेना चाहता था, इसके लिए उसने प्रेम चौहान की मदद ली और सुनियोजित तरीके से जयराम मांझी की हत्या की। लेकिन आरोपी मृतक के पैसों को नही निकाल सके। पुलिस के अनुसार, मामले के खुलासे में एसआईटी की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी जांच की महत्वपूर्ण भूमिका रही।