धनबाद : जिले के प्रतिष्ठित बीएसएस महिला महाविद्यालय में इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही और मनमानी के चलते अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई है। एक ओर जहां पिछले छह-सात महीनों से वेतन न मिलने के कारण नॉन टीचिंग स्टाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं, वहीं दूसरी ओर कॉलेज में आयोजित होने वाले डांडिया कार्यक्रम के अचानक रद्द होने से दूर-दराज से पहुंची छात्राएं बुरी तरह मायूस होकर लौट गईं।
पिछले 6 महीनों से हम लोगों का वेतन नहीं मिला है - असिस्टेंट लाइब्रेरियन शशि भूषण कुमार
कॉलेज के असिस्टेंट लाइब्रेरियन शशि भूषण कुमार ने दर्द साझा करते हुए बताया कि पिछले छह महीनों से हम लोगों का वेतन नहीं मिला है और अक्टूबर का महीना मिला लें तो यह अवधि सात महीने तक पहुंच जाती है। कई बार मौखिक रूप से और विभिन्न माध्यमों से प्राचार्या से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उन्होंने बताया कि दुर्गा पूजा की शुरुआत से ठीक पहले, 12 तारीख को हम लोगों ने लिखित आवेदन दिया। इसके बाद हमें सचिव से मिलने की बात कहकर टालमटोल किया जाने लगा। अगले दिन जब हम सचिव के आदेश का हवाला लेकर पहुंचे। दो दिन का समय देते हुए 14 तारीख तक भुगतान करने की मांग की क्योंकि सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक कॉलेज में रहने के कारण हमारे पास कमाई का कोई अन्य जरिया नहीं है। यह त्योहारी सीजन है तो कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई।
किसी को भी बिना कोई सूचना दिए, प्रभारी प्राचार्या अचानक अपना आवेदन देकर यह कहकर चली गईं कि उन्हें अतिआवश्यक कार्य है - कर्मचारी
कर्मचारियों का आरोप है कि किसी को भी बिना कोई सूचना दिए, प्रभारी प्राचार्या अचानक अपना आवेदन देकर यह कहकर चली गईं कि उन्हें अतिआवश्यक कार्य है। अगले दिन जब कॉलेज पहुंचे तो पता चला कि प्राचार्या गायब हैं। ऐसे में मजबूर होकर हम सभी को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठना पड़ा है। नॉन टीचिंग कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं होता, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा और काम पूरी तरह ठप रहेगा।
डांडिया रद्द होने से नाराज हुईं दूर-दराज से आईं छात्राएं...
एक तरफ जहां नॉन टीचिंग कर्मचार वेतन के लिए धरने पर हैं, वहीं कॉलेज में आयोजित होने वाले डांडिया कार्यक्रम को लेकर छात्राओं में भारी नाराजगी देखने को मिली। डांडिया खेलने पहुंची एक छात्रा ने बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप पर क्लास में मैसेज आया था कि आज कॉलेज में सुबह 11 बजे डांडिया का कार्यक्रम होगा। लेकिन जब हम यहां पहुंचे तो पता चला कि न तो कोई कार्यक्रम हो रहा है और न ही हमारे लिए कोई कमरा खोला गया है।
यदि कार्यक्रम रद्द करना ही था तो उसका दूसरा संदेश भी आना चाहिए था - छात्राओं
छात्राओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यदि कार्यक्रम रद्द करना ही था तो उसका दूसरा संदेश भी आना चाहिए था। हड़ताल के कारण हमें मुख्य गेट से ही वापस लौटा दिया गया। दूर-दराज से आने के कारण हमारा कीमती समय और किराया दोनों बर्बाद हुआ। इसमें हमारी कोई गलती नहीं है, लेकिन कॉलेज प्रशासन की इस प्रकार की लापरवाही और कुव्यवस्था के कारण हमें और हमारे अभिभावकों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल, महाविद्यालय परिसर में शिक्षकों की हड़ताल और छात्राओं के हंगामे के कारण शैक्षणिक व सांस्कृतिक गतिविधियां पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं।