शिक्षा, शोध और नवाचार का नया केंद्र बन रहा आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, कुलपति डॉ शरद कुमार यादव की बड़ी उपलब्धि

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना ने जनवरी 2024 से अब तक शिक्षा, शोध, नवाचार, कौशल विकास, डिजिटल गवर्नेंस और उद्योग-अकादमिक सहयोग के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना ने जनवरी 2024 से अब तक शिक्षा, शोध, नवाचार, कौशल विकास, डिजिटल गवर्नेंस और उद्योग-अकादमिक सहयोग के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में नए स्कूलों, पाठ्यक्रमों और शोध केंद्रों की स्थापना के साथ विद्यार्थियों के लिए आधुनिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा का दायरा लगातार विस्तृत किया गया है।

विश्वविद्यालय में सभी स्कूलों के शैक्षणिक मार्गदर्शन के लिए शैक्षणिक सलाहकार समिति का गठन किया गया। पत्रकारिता एवं जनसंचार, भूगोल, नदी अध्ययन, पाटलिपुत्र स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, स्टेम सेल टेक्नोलॉजी, खगोल विज्ञान और दर्शनशास्त्र जैसे केंद्रों को स्कूल के रूप में विकसित कर पठन-पाठन एवं शोध कार्य शुरू किए गए। वहीं कानून एवं विधि विज्ञान, प्रबंधन अध्ययन तथा शहरी नीति एवं सुशासन के लिए नए केंद्र स्थापित किए गए। शहरी नीति एवं सुशासन केंद्र बिहार में अपनी तरह की महत्वपूर्ण अकादमिक पहल के रूप में सामने आया है।

उनके कार्यकाल में अकादमिक विस्तार के तहत नैनोसाइंस एवं नैनोटेक्नोलॉजी, नदी विज्ञान, जल संसाधन अभियांत्रिकी, जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष विज्ञान एवं खगोल विज्ञान, प्रबंधन, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र, पत्रकारिता एवं संचार तथा भूगोल में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए गए। फिल्म निर्माण, फोटोग्राफी, डिजिटल एवं ऑनलाइन पत्रकारिता, मीडिया लेखन तथा स्टेम सेल जीवविज्ञान एवं पुनर्योजी चिकित्सा जैसे रोजगार एवं शोध आधारित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ हुए। नैनोसाइंस के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण पेटेंट प्रकाशन विश्वविद्यालय की शोध क्षमता को रेखांकित करते हैं।

डॉ. यादव की अगुवाई में विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों को लागू करते हुए पाठ्यक्रमों को अद्यतन किया है। शोध को संस्थागत मजबूती देने के लिए रिसर्च कंसोर्टियम का गठन, इनक्यूबेशन सेंटर और प्लेसमेंट सेल की स्थापना तथा आधुनिक केंद्रीय पुस्तकालय और आईटी सेल का विकास किया गया। डिजिटल परिवर्तन की दिशा में समर्थ प्रणाली के माध्यम से ई-गवर्नेंस को भी बढ़ावा दिया गया है। अकादमिक और परीक्षा कैलेंडर तैयार करने के साथ गुणवत्ता आश्वासन एवं संस्थागत बेंचमार्किंग में भी प्रगति दर्ज की गई है।

शोध और अकादमिक सहयोग को गति देने के लिए विश्वविद्यालय ने आईआईटी पटना, आईजीआईएमएस, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, एनआईईएलआईटी, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, अमिटी विश्वविद्यालय, डीवाई पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जेपी विश्वविद्यालय समेत अनेक राष्ट्रीय संस्थानों और उद्योगों के साथ समझौते किए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी, स्टेम सेल विज्ञान और अंतरिक्ष शिक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया गया है। वर्ष 2026 में पायथन प्रोग्रामिंग एवं व्यावसायिक अनुप्रयोगों में जनरेटिव एआई को लेकर भी समझौता हुआ है।

विश्वविद्यालय ने बिहार के आर्यभट्ट स्पेस क्लब की स्थापना की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी के संचालन के लिए कार्यशालाएं आयोजित की गईं तथा सर्वे ऑफ इंडिया और सैटकॉम इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सहित संस्थानों के साथ सहयोग विकसित किया गया। विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने के साथ कौशल विकास और उद्योगोन्मुख शिक्षा पर भी जोर दिया गया है। भूगोल विभाग और बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड के सहयोग से करीब 900 विद्यार्थियों को भू-सर्वेक्षण संबंधी उन्नत प्रशिक्षण दिया गया।

विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अकादमिक उपस्थिति मजबूत की है। जापान जाने वाले भारतीय कुलपतियों के प्रतिनिधिमंडल तथा ब्रिटेन जाने वाले अंतर-विश्वविद्यालय सहयोग प्रतिनिधिमंडल में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व हुआ। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के ईस्ट जोन वाइस चांसलर मीट का आयोजन भी विश्वविद्यालय में हुआ, जिसमें करीब 100 विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हुए। एआईयू द्वारा अकादमिक एवं प्रशासनिक विकास केंद्र की स्थापना भी महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव के नेतृत्व में विश्वविद्यालय का फोकस अब शिक्षा को शोध, कौशल, तकनीक, उद्योग और समाज की जरूरतों से जोड़ने पर है। साइबर सुरक्षा, सामाजिक व्यवहार परिवर्तन, शहरी नीति, अंतरिक्ष विज्ञान, स्टेम सेल, नैनोटेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया जैसे क्षेत्रों में नई पहलें विश्वविद्यालय को पारंपरिक शिक्षा संस्थान से आगे बढ़ाकर शोध एवं नवाचार के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।