पटना: बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और बैंक खाते को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। बिहार के सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र रखना अनिवार्य है। स्कूल के अभिलेख में प्रत्येक बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र सुरक्षित रखना होगा। वहीं सभी बच्चों का सरकारी या राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खुलवाना भी अनिवार्य किया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
DBT की राशि भेजने के लिए सिंगल या ज्वाइंट बैंक खाते की सुविधा मिलेगी। प्रधानाध्यापक नजदीकी बैंक शाखा प्रबंधकों से संपर्क कर खाते खुलवाएंगे। छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों के बैंक खाते खुलवाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुखिया और पंचायत सचिव से संपर्क कर जन्म प्रमाण पत्र बनवाया जाएगा। 31 दिसंबर 2026 तक पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पाण्डेय द्वारा 5 नवंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार, सभी सरकारी विद्यालयों के बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र विद्यालय के अभिलेख में रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से लाभ प्राप्त करने के लिए सभी बच्चों का एकल अथवा संयुक्त बैंक खाता खुलवाने का निर्देश दिया गया है।
जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापकों को
विभाग ने निर्देश दिया है कि जिन बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक संबंधित ग्राम पंचायत मुखिया, पंचायत सेवक अथवा नगर निकाय से संपर्क कर जन्म प्रमाण पत्र बनवाना सुनिश्चित करेंगे।
सरकारी या राष्ट्रीयकृत बैंक में खुलेगा खाता
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी बच्चों का बैंक खाता सरकारी अथवा राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जाना चाहिए। खाता एकल या संयुक्त हो सकता है। यह व्यवस्था डीबीटी के जरिए बच्चों को मिलने वाले लाभ के लिए आवश्यक बताई गई है।
छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान
पत्र में सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र और बैंक खाता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें।
31 दिसंबर 2026 तक पूरा करना होगा काम
शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को यह कार्य अभियान चलाकर 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।