पटना कंज्यूमर कोर्ट का आदेश, बीमा कंपनी को लौटानी होगी प्रीमियम राशि

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने बीमा पॉलिसियों से संबंधित एक मामले में निर्णय सुनाते हुए रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को परिवादी द्वारा ली गई आठ बीमा पॉलिसियों के तहत जमा प्रीमियम की राशि ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया है।

पटना: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने बीमा पॉलिसियों से संबंधित एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को परिवादी द्वारा ली गई आठ बीमा पॉलिसियों के तहत जमा प्रीमियम की राशि ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी को मानसिक एवं शारीरिक परेशानी के लिए 40,000 मुआवजा और मुकदमे में हुए खर्च के लिए 20,000 अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।

मामले के अनुसार, पटना सिटी निवासी परिवादी मनोज कुमार चौधरी ने आठ बीमा पॉलिसियों के लिए कुल लगभग 4,97,873 का प्रीमियम जमा किया था। परिवादी का आरोप था कि बीमा कंपनी के एजेंट ने कथित रूप से प्रलोभन एवं भ्रामक जानकारी देकर पॉलिसियां ली थीं। बाद में आर्थिक कठिनाइयों के कारण पॉलिसियां जारी रखना संभव नहीं होने पर उन्होंने उन्हें रद्द कर प्रीमियम की राशि वापस करने का अनुरोध किया, लेकिन राशि वापस नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिवादी ने स्वेच्छा से पॉलिसियां ली थीं और निर्धारित अवधि के भीतर पॉलिसियां रद्द करने का विकल्प नहीं अपनाया था। आयोग ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों की समीक्षा करते हुए पाया कि बीमा कंपनी सभी आठ पॉलिसियों के दस्तावेजों के प्रेषण एवं वितरण को संतोषजनक साक्ष्यों के आधार पर प्रमाणित करने में विफल रही। आयोग ने यह भी पाया कि प्रस्तुत डाक ट्रैकिंग रिपोर्ट में कंपनी द्वारा अपने लिखित पक्ष में बताई गई प्रेषण तिथियों से विसंगति थी और दो पॉलिसियों के दस्तावेजों के संबंध में पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। 

आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि बीमा पॉलिसी के दस्तावेजों की प्राप्ति प्रमाणित किए बिना बीमा कंपनी केवल निर्धारित अवधि में पॉलिसी रद्द नहीं किए जाने के आधार पर प्रीमियम की वापसी से इनकार नहीं कर सकती। दस्तावेजों के प्रेषण एवं वितरण को प्रमाणित करने में विफलता को सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने परिवादी के पक्ष में निर्णय दिया।    

कोर्ट से पारित इस आदेश के अनुसार, बीमा कंपनी को आठों पॉलिसियों के अंतर्गत प्राप्त प्रीमियम की राशि पर प्रथम प्रीमियम भुगतान की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके अतिरिक्त 40,000 रुपये मुआवजा और 20,000 रुपये मुकदमा खर्च का भुगतान भी करना होगा। आयोग ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर अनुपालन करने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में आदेश का अनुपालन नहीं होने पर बकाया राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज देय होगा। यह निर्णय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग,  पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र एवं सदस्य रजनीश कुमार के स्तर से पारित किया गया।