राज्य सरकार की बडी पहल, गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए 30 सितंबर को लॉन्च होगा पोर्टल

बिहार में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और गन्ना उद्योग को फिर से मजबूत करने के लिए सरकार ने कई योजनाओं और नई पहलों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की कवायद तेज कर दी है।

पटना: बिहार में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और गन्ना उद्योग को फिर से मजबूत करने के लिए सरकार ने कई योजनाओं और नई पहलों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को बामेती, पटना में गन्ना किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। संगोष्ठी में किसानों को गन्ने की वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज, यंत्रीकरण, गुड़ उत्पादन और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई।

मंत्री ने कहा कि बिहार से पलायन रोकने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को खेत तक गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक तकनीक और कृषि यंत्र उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने पिछले वर्षों में गन्ने की खेती कम कर दी थी, उन्हें फिर से इस फसल की ओर लाने के लिए विभाग स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से कम जमीन में अधिक उत्पादन की तकनीक किसानों तक पहुंचाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याओं और विभागीय योजनाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 30 सितंबर को एक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। पोर्टल के माध्यम से किसान अपनी समस्या दर्ज कर सकेंगे और योजनाओं तथा अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों के संपर्क में रहने और योजनाओं का लाभ लेने के लिए समय पर आवेदन करने की अपील की।

मंत्री ने कहा कि राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और नई चीनी मिलें स्थापित करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और करीब 25 चीनी मिलों की स्थापना की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखा है। बेगूसराय में भी चीनी मिल स्थापित की जाएगी। उन्होंने बताया कि वारिसलीगंज क्षेत्र में चीनी मिल की स्थापना के लिए करीब 99.39 एकड़ जमीन गन्ना उद्योग विभाग को उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है।  मंत्री ने कहा कि इससे गन्ने का रकबा बढ़ेगा, किसानों को बाजार मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि जिन क्षेत्रों में चीनी मिलें नहीं हैं, वहां किसानों को गुड़ उत्पादन से जोड़ने की योजना है। छोटे स्तर पर चलने वाले पारंपरिक कोल्हू की जगह आधुनिक और यंत्रीकृत गुड़ उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए सरकार अनुदान दे रही है। उन्होंने किसानों से गन्ने की वैज्ञानिक खेती अपनाने और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए विभागीय अधिकारियों के संपर्क में रहने की अपील की। सचिव ने कहा कि गन्ने का उत्पादन बढ़ने से भविष्य में चीनी मिलों और अन्य कृषि आधारित उद्योगों के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार होगा।

ईखायुक्त अनिल कुमार झा ने बताया कि गन्ने की खेती से जुड़े यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 10 लाख रुपये की लागत वाले यंत्र बैंक में किसान को करीब दो लाख रुपये खर्च करने होंगे, जबकि आठ लाख रुपये तक सरकार की ओर से अनुदान दिया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि किसानों को गन्ने की खेती के लिए नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराने की योजना भी संचालित की जा रही है। फाउंडेशन सीड के उत्पादन के लिए प्रति हेक्टेयर 70 हजार रुपये तक सहायता का प्रावधान बताया गया। प्रमाणित बीज उत्पादन और किसानों को बीज उपलब्ध कराने के लिए भी अलग-अलग प्रोत्साहन राशि निर्धारित की गई है।

ईखायुक्त ने कहा कि किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए गांव और पंचायत स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों को देश के उन्नत गन्ना उत्पादन केंद्रों का भ्रमण भी कराया जा रहा है। उन्होंने किसानों से गन्ना आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि यह विभाग से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भविष्य में इसी के माध्यम से किसानों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।

संगोष्ठी में वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ने की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती, बेहतर बीज चयन, तकनीकी प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। विभाग ने किसानों को भरोसा दिलाया कि खेती से लेकर उत्पादन और बाजार तक उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और विभाग उनके साथ खड़े हैं। इस मौके पर ईंख उत्पादक किसान को यांत्रिकीकरण योजना के तहत मंत्री ने ट्रैक्टर की चाबी सौंपी। वहीं, पटना और गयाजी के किसानों ने भी अपने-अपने जिलों में चीनी मिल तथा भोजपुर के किसानों ने अपने जिले में यंत्र बैंक स्थापित करने की मांग की। इस दौरान संयुक्त ईखायुक्त वेदव्रत कुमार, संयुक्त निदेशक रेमन्त झा, ईख अनुसंधान संस्थान पूसा के वरीय वैज्ञानिक डॉ. डीएन कामत, डॉ. अनिल कुमार सहित अन्य वैज्ञानिक, पटना, भोजपुर, जहानाबाद और गयाजी जिले के किसान उपस्थित रहे।