पटना: बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और कृषि-आधारित उद्योगों को नई गति देने के लिए राज्य सरकार तेजी से प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने मंगलवार को विकास भवन स्थित अपने कक्ष में सहकारी चीनी मिल परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को रैयाम और सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना तय समय-सीमा में पूरी करने का निर्देश दिया।
सात निश्चय-3 के अंतर्गत "समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार" के लक्ष्य के तहत दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना पर काम चल रहा है। बैठक में दोनों प्रस्तावित मिलों के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), वित्तीय प्रावधान, किसान सदस्यता अभियान, इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) के साथ प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। ये परियोजनाएं केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इन्हें एकीकृत कृषि-आधारित औद्योगिक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि आईपीएल के साथ एमओयू का प्रारूप तैयार कर माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया है और अनुमोदित प्रारूप सहमति के लिए आईपीएल को भेजा जा चुका है। रैयाम एवं सकरी मिलों की भूमि को 30 वर्षों के पट्टे पर आईपीएल को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है। दोनों नई सहकारी चीनी मिलों की कुल अनुमानित लागत 852.43 करोड़ रुपये है। इसमें रैयाम परियोजना की लागत 504.67 करोड़ रुपये तथा सकरी परियोजना की लागत 347.76 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं से गन्ना उत्पादन, कृषि सेवाओं, परिवहन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं की सफलता का मुख्य आधार किसानों की सक्रिय भागीदारी है। रैयाम एवं सकरी के कमांड क्षेत्र में प्राथमिक सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। किसानों में उत्साह का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक रैयाम कमांड क्षेत्र से 12,264 और सकरी कमांड क्षेत्र से 15,716, अर्थात कुल 27,980 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदनों के सत्यापन की कार्रवाई जारी है।
ये समितियां किसानों को मिल को गन्ना आपूर्ति करने में सहयोग देने के साथ-साथ उन्नत गन्ना बीज, कृषि-आदान, तकनीकी सहायता, मृदा-जांच, प्रशिक्षण एवं जागरूकता जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराएंगी। गन्ना क्षेत्र के विस्तार के लिए गांववार सर्वे की योजना पर कार्य किया जा रहा है। किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के लिए सहकारी बैंकों से समन्वय किया जाएगा तथा कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से कृषि यंत्रीकरण की सुविधा भी दी जाएगी बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निबंधक, सहयोग समितियां रजनीश कुमार सिंह, अपर निबंधक (न्यायिक) विकास कुमार बरियार सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।