गरीबों के राशन में कटौती का आरोप, बिहार के SFC गोदाम में हंगामा, जांच में सामने आया 10 किलो का अंतर

हाजीपुर/वैशाली: सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के एसएफसी गोदाम से जनवितरण प्रणाली के दुकानदारों को निर्धारित मात्रा से कम राशन देने की शिकायत सामने आई। शिकायत के बाद बुधवार को प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी मोनिका शैलेश गोदाम पहुंचीं और पूरे मामले की जांच की।

हाजीपुर/वैशाली: एक तरफ बिहार के मंत्री लखींद्र पासवान लगातार गरीबों के मिलने वाले गंदे अनाज को सवाल खड़ा करते नजर आए वहीं दूसरी ओर बिहार में गरीबों को मिलने वाले राशन की व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कहीं निर्धारित मात्रा से कम अनाज मिलने की शिकायत, तो कहीं चावल की गुणवत्ता पर सवाल...वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड स्थित एसएफसी गोदाम में राशन वितरण को लेकर हंगामे की खबर सामने आई है।

सबसे बड़ा सवाल-अगर गरीबों को उनके हक का पूरा अनाज नहीं मिल रहा, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के एसएफसी गोदाम से जनवितरण प्रणाली के दुकानदारों को निर्धारित मात्रा से कम राशन देने की शिकायत सामने आई।

शिकायत के बाद बुधवार को प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी मोनिका शैलेश गोदाम पहुंचीं और पूरे मामले की जांच की। इस दौरान अनाज की तौल और चावल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए। खबर में करीब 10 किलोग्राम के अंतर का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, यह अंतर किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में सामने आया, इसकी आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आना जरूरी है।

चावल की गुणवत्ता पर भी सवाल

मामला केवल अनाज की मात्रा तक सीमित नहीं है। दुकानदारों ने गोदाम से मिलने वाले चावल की गुणवत्ता पर भी आपत्ति जताई। खबर के अनुसार, कीड़ेयुक्त चावल मिलने की शिकायत भी की गई।

ऐसे में सवाल यह है कि राशन की गुणवत्ता की नियमित जांच किस स्तर पर हो रही है? और अगर घटिया अनाज की आपूर्ति होती है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?

दुकानदारों ने भी उठाए सवाल

जनवितरण प्रणाली के दुकानदारों का कहना है कि गोदाम से अनाज उठाव के दौरान निर्धारित मात्रा की तुलना में कम अनाज मिलने से वितरण व्यवस्था प्रभावित होती है।

दुकानदारों ने तौल और वितरण प्रक्रिया की जांच की मांग की है। वहीं, आपूर्ति पदाधिकारी ने मामले की जांच करते हुए चावल की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई और बेहतर गुणवत्ता का चावल उपलब्ध कराने की बात कही।

अब प्रशासन से सीधे सवाल

इस पूरे मामले में तीन अहम सवाल हैं-

पहला, क्या गोदाम से अनाज की तौल और आपूर्ति का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से जांचा जाता हैं? दूसरा, चावल की गुणवत्ता खराब पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई क्यों नहीं होती है?

और तीसरा, गरीब राशन कार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में गुणवत्तापूर्ण अनाज मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाएगा?

खबर के मुताबिक, स्थानीय विधायक महेंद्र राम ने भी मामले की जानकारी डीएम और एसडीओ को दी तथा जांच और कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल, इस मामले में विस्तृत जांच और आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है। शिकायतों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई ही सच्चाई सामने ला सकती है।

हाजीपुर/वैशाली से संतोष कुमार सिंह की रिपोर्ट