बिहार के सिवान जिले से बड़ी खबर है। यहां राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना दम तोडती हुई दिख रही है। आरोप है कि इस पूरी योजना को यहां के भ्रष्ट अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं। आलम यह है कि 'नल-जल योजना' कागज तक सिमटती नजर आ रही है।
मिली खबर के अनुसार बिहार सरकार भले ही अति पिछड़ों के विकास और 'हर घर नल का जल' पहुंचाने का दम भरती हो, लेकिन धरातल पर इसकी हकीकत बेहद कड़वी है। सिवान जिले के लकड़ी नबीगंज प्रखंड अंतर्गत बसौली पंचायत (वार्ड नंबर-8) के ग्रामीण आज भी चापाकल का गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी और बसौली पंचायत के मुखिया भारतेंदु लाल,की मिलीभगत से नल-जल और सोख्ता निर्माण जैसी योजनाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं। वार्ड नंबर 8, जो अति पिछड़ा (मुख्य रूप से मुसहर समुदाय) बाहुल्य क्षेत्र है, वहां विकास का नामोनिशान नहीं है। यहां तक कि कचरा प्रबंधन के नाम पर आया ठेला और बाल्टी भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुआ। बाल्टी नदी किनारे फेंक दी गई है या सूअर पालकों के पास है।
आरोप है कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना में हुए इस महाघोटाले को छुपाने के लिए चालाकी से इसे PHED के हैंडओवर कर दिया गया, ताकि स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रखंड के अधिकारी बच सकें। ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड के जेई और उच्च अधिकारियों की साठगांठ के कारण कोई जांच नहीं हो रही है। लकड़ी नबीगंज के कई पंचायत आज भी इस बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सीवान से नागेंद्र कुमार की रिपोर्ट