शहीद रामफल मंडल के परिजनों को दिया पक्का मकान, विधायक मंटू सिंह पटेल ने पेश की मिसाल

अमनौर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक और बिहार सरकार के पूर्व आईटी मंत्री मंटू सिंह पटेल ने अपने विधायक मद से मिलने वाली राशि से शहीद रामफल मंडल के परिजनों के लिए पक्का मकान बनवाने का निर्णय लिया और उसका निर्माण पूरा कराकर उन्हें सौंप दिया।

बिहार की राजनीति में अक्सर महापुरुषों और शहीदों के नाम पर बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं होती हैं। जयंती और पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, लेकिन उनके परिवारों और उनकी विरासत से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर गंभीरता से काम करने वाले जनप्रतिनिधि कम दिखाई देते हैं। ऐसे समय में अमनौर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक और बिहार सरकार के पूर्व आईटी मंत्री कृष्ण कुमार सिंह उर्फ मंटू सिंह पटेल ने सकारात्मक पहल करते हुए एक मिसाल पेश की है।

शहीद रामफल मंडल के पैतृक आवास की जर्जर स्थिति की जानकारी मिलने के बाद मंटू सिंह पटेल स्वयं सीतामढ़ी पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि शहीद के परिजनों का पैतृक घर बेहद खराब हालत में था। बारिश का पानी घर के भीतर पहुंच जाता था और दीवारें भी जर्जर हो चुकी थीं। यहां तक कि पिछले वर्ष आयोजित कार्यक्रमों में लगाए गए फ्लेक्स को टांगकर परिवार के लोग किसी तरह अपना जीवन गुजार रहे थे। इस स्थिति को देखकर विधायक मंटू सिंह पटेल ने केवल चिंता जताने या घोषणा करने के बजाय अपने विधायक मद से मिलने वाली राशि से शहीद रामफल मंडल के परिजनों के लिए पक्का मकान बनवाने का निर्णय लिया और उसका निर्माण पूरा कराकर उन्हें सौंप दिया। 

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहीद रामफल मंडल की स्मृति को लेकर बिहार में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन उनके पैतृक परिवार की वास्तविक जरूरत पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। मंटू सिंह पटेल की पहचान एक ऊर्जावान और सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में है। वे राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक कार्यों पर भी विशेष जोर देते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी उनकी पहल लगातार चर्चा में रही है। 

पटेल छात्रावास के माध्यम से बिहार के विभिन्न जिला मुख्यालयों में छात्रावास निर्माण का कार्य चल रहा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और रहने की सुविधा उपलब्ध कराना है।दरअसल, किसी महापुरुष या शहीद को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनकी जयंती या पुण्यतिथि मनाने से नहीं, बल्कि उनकी स्मृतियों को सुरक्षित रखने और उनके परिवार की जरूरतों को समझने से भी होती है। 

बिहार में ऐसे अनेक महापुरुष और स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं, जिनके योगदान को राजनीतिक मंचों से याद तो किया जाता है, लेकिन उनके पैतृक आवासों और परिवारों की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।मंटू सिंह पटेल की यह पहल इसी सोच को बदलने वाली है। राजनीति में यदि घोषणाओं के बजाय ऐसे जमीन पर उतरकर काम करने की परंपरा मजबूत हो, तो महापुरुषों और शहीदों के सम्मान का अर्थ कहीं अधिक सार्थक हो सकता है।

शहीद रामफल मंडल के परिजनों को पक्का घर मिलना सिर्फ एक परिवार के लिए आवास की सुविधा नहीं, बल्कि उस शहीद की स्मृति और सम्मान को संरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। यही वजह है कि मंटू सिंह पटेल की यह पहल राजनीतिक बयानबाजी से अलग एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

अनूप नारायण सिंह