सीतामढ़ी जिले से राज्य के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग में रिश्वतखोरी का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि सीतामढ़ी में पदस्थापित एक डेटा एंट्री ऑपरेटर अनुदान राशि जारी करने के बदले 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। शिकायत सीधे विभागीय मंत्री लखेंद्र पासवान तक पहुंची, जिसके बाद मंत्री ने मौके पर ही मामले की सत्यता की जांच कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
जानकारी के अनुसार, सीतामढ़ी से आए कुछ फरियादियों ने मंत्री से मुलाकात कर आरोप लगाया कि सरकारी सहायता राशि जारी कराने के लिए उनसे रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत सुनने के बाद मंत्री ने फरियादियों से आरोपी कर्मचारी को तत्काल फोन मिलाने को कहा। कॉल स्पीकर पर की गई ताकि पूरी बातचीत सभी सुन सकें। फोन रिसीव होते ही आरोपी डेटा एंट्री ऑपरेटर ने अनुदान राशि जारी करने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग दोहरा दी। उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसकी बातचीत स्वयं मंत्री भी सुन रहे हैं। बातचीत समाप्त होते ही मंत्री ने तत्काल सीतामढ़ी के जिला कल्याण पदाधिकारी से फोन पर संपर्क कर संबंधित डेटा एंट्री ऑपरेटर की सेवा समाप्त करने का निर्देश दिया।
मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जिस कार्यालय में संबंधित कर्मचारी कार्यरत था, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है।
मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के पात्र लाभार्थियों को सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता उनका कानूनी अधिकार है। यदि कोई कर्मचारी इस अधिकार के बदले रिश्वत मांगता है, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मंत्री के निर्देश के बाद संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही पूरे मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीतामढ़ी से सरोज कुमार गुप्ता की रिपोर्ट