कभी मां ने गर्भ में पल रही उस बच्ची को जन्म न देने का फैसला कर लिया था। अस्पताल पहुंच चुकी थीं, इंजेक्शन भी लग चुका था। तभी टेलीविजन पर प्रीति जिंटा की फिल्म "क्या कहना" चल रही थी। फिल्म का संदेश उनके दिल को इस कदर छू गया कि उन्होंने उसी पल अपना फैसला बदल दिया। आज वही बच्ची करोड़ों लोगों की प्रेरणा बन चुकी है। उसका नाम है संचिता बसु।
बिहार के सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड के सतुआहा पंचायत स्थित महा महादेव मठ गांव से निकलकर संचिता ने वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना बड़े-बड़े शहरों के युवा देखते हैं। एक छोटे से गांव की बेटी आज साउथ फिल्म इंडस्ट्री में मुख्य अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान बना रही है। संचिता की सफलता किसी चमत्कार की कहानी नहीं, बल्कि मेहनत, प्रतिभा और परिवार के विश्वास की कहानी है।
मोबाइल से बनाए गए छोटे-छोटे डांस वीडियो से शुरू हुआ सफर देखते ही देखते सोशल मीडिया पर छा गया। करोड़ों लोगों ने उनकी प्रतिभा को पसंद किया और आज उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 11 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं।माउंट कार्मेल स्कूल, भागलपुर की छात्रा रहीं संचिता पढ़ाई के साथ-साथ अभिनय के अपने सपने को भी जीती रहीं। इंटर की परीक्षा के बाद हैदराबाद में उनकी पहली साउथ फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। यह उनके वर्षों के संघर्ष और समर्पण का परिणाम था।
संचिता बताती हैं कि बचपन से ही टीवी पर डांस देखकर सीखती थीं और फिर मोबाइल से वीडियो बनाकर इंटरनेट पर अपलोड करने लगीं। शुरुआत में उनकी मौसी की बेटी नीतू कुमारी वीडियो रिकॉर्ड कर अपलोड करती थीं। जब माता-पिता को बेटी की रुचि का पता चला तो उन्होंने रोकने के बजाय उसका साथ दिया। यही विश्वास संचिता की सबसे बड़ी ताकत बना।
स्नेक ऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोकप्रिय होने के बाद उन्हें संगीत एल्बमों में काम करने का मौका मिला। जी म्यूजिक सहित कई बैनरों के साथ उन्होंने काम किया और धीरे-धीरे मनोरंजन जगत के लोगों की नजर उन पर पड़ी। आखिरकार उन्हें साउथ फिल्म इंडस्ट्री में मुख्य अभिनेत्री बनने का अवसर मिला।
संचिता के पिता सुरेंद्र यादव उर्फ कंपनी राय एक संपन्न किसान हैं और उनकी मां रवीना राय गृहिणी हैं। दोनों ने कभी बेटी के सपनों को बोझ नहीं समझा। शायद यही वजह है कि आज पूरे गांव में उनकी सफलता पर गर्व और उत्सव का माहौल है। लेकिन संचिता की सबसे बड़ी पहचान सिर्फ उनकी सफलता नहीं, बल्कि उनका अस्तित्व है।यदि उस दिन उनकी मां ने फिल्म "क्या कहना" देखकर अपना निर्णय न बदला होता, तो शायद यह प्रेरक कहानी कभी लिखी ही नहीं जाती।
संचिता बसु की कहानी हमें याद दिलाती है कि हर बेटी एक संभावना है, हर जन्म एक अवसर है और हर सपना पूरा हो सकता है—अगर परिवार भरोसा करे और समाज बेटियों को उड़ान भरने दे।आज संचिता सिर्फ साउथ फिल्मों की नई अभिनेत्री नहीं हैं, बल्कि उन लाखों बेटियों की उम्मीद हैं जिन्हें कभी कमज़ोर समझ लिया जाता है। उनकी कहानी बताती है कि मंजिल गांव या शहर नहीं देखती, वह सिर्फ हौसला, मेहनत और विश्वास देखती है।
अनूप नारायण सिंह