ऑपरेशन तलाश: 179 गुमशुदा लापता व अपहृत बच्चों की बरामदगी

बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार गुमशुदा व लापता अपहृत बच्चों की बरामदगी हेतु "ऑपरेशन तलाश" के जरिए अब तक सहरसा जिला से 67, सुपौल जिला से 68 एवं मधेपुरा जिला से 44 सहित कुल 179 गुमशुदा लापता व अपहृत बच्चो की बरामदगी की जा चुकी है।

सहरसा: बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार गुमशुदा व लापता अपहृत बच्चों की बरामदगी हेतु "ऑपरेशन तलाश" नामक एक अभियान 20 अगस्त से 10 सितंबर तक पूरे बिहार में चलाया गया। यह अभियान कोशी क्षेत्रान्तर्गत सहरसा, सुपौल एवं मधेपुरा जिला में पुलिस उप-महानिरीक्षक कार्यालय, कोशी क्षेत्र, सहरसा द्वारा लगातार अनुश्रवण किया गया। 

इस अभियान के प्रारंभ होने अब तक सहरसा जिला से 67, सुपौल जिला से 68 एवं मधेपुरा जिला से 44 सहित कुल 179 गुमशुदा लापता व अपहृत बच्चो की बरामदगी की जा चुकी है। जिसमे तीनों जिलों से बरामद नाबालिक बच्चों में बालिका-153, बालक 16 एवं शादीशुदा महिला की संख्या 10 है। 

बरामदगी के उपरांत आवश्यक कानूनी कार्रवाई पश्चात इन लोगों को न्यायालय के आदेशानुसार विधिवत् इनके परिजनों विधिक प्राधिकार को सौंपा गया है। इस अभियान को सफल बनाने में तीनों जिलों के नोडल पदाधिकारी, एएचटीयू प्रभारी क्रमशः पुलिस उपाधीक्षक यातायात सह विशेष अपराध इकाई, सहरसा, ओम प्रकाश कुमार, एएचटीयू प्रभारी, सहरसा, पुलिस निरीक्षक कृष्णा प्रसाद सिंह, पुलिस उपाधीक्षक साइबर सह विशेष अपराध इकाई, सुपौल, गौरव गुप्ता,एएचटीयू प्रभारी, सुपौल, राजेश कुमार झा, पुलिस उपाधीक्षक साइबर सह विशेष अपराध इकाई, मधेपुरा, आशीष राज,एएचटीयू प्रभारी, मधेपुरा, संजीव कुमार तथा पुलिस उप महानिरीक्षक कार्यालय, कोशी क्षेत्र, सहरसा के अपर पुलिस अधीक्षक, एमएसएच फाखरी एवं पुलिस अवर निरीक्षक श्वेत कमल की अहम भूमिका रही है।

जिसके लिए इन सभी को इस अभियान में किये गये उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में मानव व्यापार, बाल श्रम, अनैतिक कार्य जैसे अपराधों पर रोकथाम, साइबर के माध्यम से होने वाले अपराध, महिला एवं बाल अपराध जैसे अपराधों पर प्रभावी रूप से नियंत्रण करना है।

आमजनों से अपील है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को दें तथा कानून का पालन करते हुए समाज में शांति, सुरक्षा और सद्भाव बनाए रखने में सहयोग करें। अपराध की सूचना छिपायें नहीं, अनजान नंबर से या अपरिचित व्यक्ति द्वारा किये गये फर्जी कॉल से बचें साथ हीं अपने बच्चों को भी इसके प्रति जागरूक करें। यह भी बतायें कि अनजान नम्बर या अपरिचित द्वारा सरकारी नौकरी, अच्छी वेतन वाली नौकरी का झाँसा देने वाले बातों पर विश्वास न करें तथा इस सबंध में पूर्णत जांच पड़ताल करने के बाद ही कोई निर्णय ले। 

आए दिन इस तरह की घटना घटित हो रही है कि फर्जी कॉल के माध्यम से प्रेम जाल में बच्चियों को बहला-फुसलाकर भगा ले जाते हैं और उन्हें अन्य राज्य में ले जाकर या तो वेश्यावृति या शादी के लिये या मानव अंग के व्यापार हेतु महंगे दामों में बेच दिया जाता है।  जिससे बच्चियों की जिंदगी नर्क बन जाती है अथवा उनकी जान चली जाती है। सोशल मीडिया पर आने वाले विज्ञापन एवं प्रलोभन वाले प्रचार तंत्रों से सतर्क रहे। इससे सबंधित शिकायत के लिये निम्न टॉल फ्री नम्बर पर सपर्क करें। 

1098 चाईल्ड हेल्पलाईन 181 राष्ट्रीय महिला हेल्पलाईन, 1930 साइबर क्राईम हेल्पलाईन 1091 महिला पुलिस हेल्पलाईन। अपराध की रोकथाम केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्त्तव्य है, इसलिए ऐसे किसी भी मामले की जानकारी होने पर तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थानों संबंधित विभागों को कृपया सूचना में सहयोग करें।

सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट