सहरसा जिले के सदर अस्पताल में मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर गुरुवार को अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट (डीएस) डॉ. एसके आजाद और प्रभारी डीपीएम सिंपी कुमारी के बीच तीखी बहस हो गई। घटना सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद के कार्यालय में प्रेसवार्ता से ठीक पहले हुई।
मिली जानकारी के अनुसार डीएस डॉ. एसके आजाद ने सिविल सर्जन के सामने प्रभारी डीपीएम से अस्पताल की व्यवस्था को लेकर शिकायत की। उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मरीजों को समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने से परेशानी हो सकती है। उन्होंने व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए नाराजगी जताई और कहा कि इतने दिन से हम भी आपको पहचान रहे हैं। कम आवाज में बोलिए। जब मरीज मर जाएगा, तब ऑक्सीजन की व्यवस्था कीजिएगा। रोज सुबह-सुबह यही झंझट है।
डीएस ने मरीजों और उनके परिजनों को होने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर पद छोड़ने तक की बात कही। वहीं, प्रभारी डीपीएम सिंपी कुमारी ने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग होने पर वह हमेशा उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने डीएस को आश्वस्त करते हुए कहा कि आज से आपको ऑक्सीजन के सिलेंडर की कमी नहीं होगी।
बताया गया कि डीपीएम विनय रंजन के तबादले के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर वरीय अधिकारी को डीपीएम की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया गया था। राज्य स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष सह जिलाधिकारी दीपेश कुमार के आदेश पर सदर अस्पताल में मैनेजर के पद पर तैनात सिंपी कुमारी को डीपीएम का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने उन्हें डीपीएम का पदभार ग्रहण कराया। एक ही अधिकारी के पास अस्पताल मैनेजर और डीपीएम, दोनों पदों की जिम्मेदारी होने के कारण उन्हें दोनों कार्यालयों का काम संभालना पड़ रहा है। डीएस का आरोप है कि इससे अस्पताल की व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसका असर मरीजों और अस्पताल कर्मियों पर पड़ रहा है।
सिविल सर्जन के सामने दोनों अधिकारियों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। स्थिति को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने हस्तक्षेप किया और डीएस को शांत कराया। इसके बाद उन्हें वहां से जाने के लिए कहा गया। घटना के दौरान अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने को लेकर अधिकारियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आया।
सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट